एक प्रेरण कुण्डली का अन्योन्य प्रेरकत्व $5\,H$ है। यदि प्राथमिक कुण्डली में ${10^{ - 3}}\,s$ में धारा $5\,A$ से घटकर शून्य हो जाती है। द्वितीयक कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल का मान .......$V$ होगा
$2500$
$25000$
$2510$
$0$
यदि किसी कुण्डली में $0.01 \,A$ का धारा परिवर्तन, दूसरी कुण्डली के चुम्बकीय फ्लक्स में $1.2 \times {10^{ - 2}}\,Wb$ का परिवर्तन करता है, तो दोनों कुण्डलियों के अन्योन्य प्रेरकत्व का मान हेनरी में.....$H$ है
जब एक कुण्डली में बहने वाली धारा $0.1$ सैकण्ड में $10$ ऐम्पियर से शून्य कर दी जाती है तो नजदीक रखी दूसरी कुण्डली में $100$ मिली वोल्ट का वि. वा. बल प्रेरित होता है। दोनों कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरण गुणांक का मान ......मिली हेनरी होगा
तार से बने त्रिज्या $a$ के छोटे वृत्ताकार वलय को त्रिज्या $b$ के एक बृहत् वृत्ताकार वलय के केन्द्र पर रखा गया है। दोनों वलय एक ही समतल में हैं। त्रिज्या $b$ के बाह्य वलय में एक प्रत्यावर्ती धारा $I=I_{0} \cos (\omega t)$ प्रवाहित की जाती है। त्रिज्या $a$ वाले आन्तरिक वलय में प्रेरित विद्युत वाहक बल होगा
$l$ भुजा वाला, तार का एक छोटा वगोकार घेरा, $L$ भुजा वाले, तार के एक बड़े वर्गाकार घेरे के अन्दर रखा है, यहाँ $( L \gg l)$ है। चित्र में दर्शाये अनुसार, दोनों घेरे एक ही तल में रखे हैं, एवं दोनों के केन्द्र बिन्दु $O$ पर सम्पाती हैं। निकाय का पारस्परिक प्रेरकत्व होगा :
एक ' $R$ ' त्रिज्या वाले तार के एक छोटे वृत्ताकार पाश का भुजा $\mathrm{L}(\mathrm{L}>\mathrm{R})$ के तार के एक बड़े वर्गाकार पाश के अन्दर रखा गया है, इस व्यवस्था में अन्योन्य प्रेरकत्व ज्ञात कीजिए। दोनो पाश सह-तलीय तथा सकेन्द्रिय हैं।