दो वृत्ताकार कुण्डलियों को चित्रानुसार तीन स्थितियों में व्यवस्थित किया जा सकता है। उनका अन्योन्य प्रेरकत्व होगा
स्थिति $(A)$ में अधिकतम
स्थिति $(B)$ में अधिकतम
स्थिति $(C)$ में अधिकतम
सभी स्थितियों में
समान लम्बाई $l$ की दो लम्बी सम-अक्षीय परिनालिकाये हैं। आन्तरिक एवं बाह्य कुण्डलियों की त्रिज्यायें क्रमशः
$r _{1}$ तथा $r _{2}$ है और प्रति इकाई लम्बाई फेरों की संख्या क्रमश: $n _{1}$ तथा $n _{2}$ है। आन्तरिक कुण्डलों के अन्योन्य प्रेरकत्व तथा स्वप्रेकरत्व का अनुपात होगा।
किसी ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक तथा द्वितीयक कुण्डली में अन्योन्य प्रेरकत्व $0.2$ हेनरी है। जब प्राथमिक कुण्डली में धारा $5$ ऐम्पियर/सैकण्ड की दर से बदलती है, तो द्वितीयक कुण्डली में उत्पé वि. वा. बल ......वोल्ट होगा
दो वृत्ताकार कुण्डलियों के केन्द्र एक ही बिन्दु पर स्थित हैं। दोनों का अन्योन्य प्रेरकत्व $(Mutual inductance)$ तब अधिकतम होगा, जब दोनों के अक्ष परस्पर
रुद्ध-दोल धारामापी का संकेतक स्थिर विक्षेप देता है क्योंकि
दो परिपथों के बीच अन्योन्य प्रेरण गुणांक $0.09$ हेनरी है। यदि प्राथमिक कुण्डली में धारा $0.006$ सैकण्ड में $0$ से $20$ ऐम्पियर हो जाती है, तो द्वितीयक कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल का औसत मान .....वोल्ट होगा