किसी रबड़ की गेंद को फर्श से $5\, m$ की ऊँचाई से मुक्त किया गया है। यह बार-बार उछलती है और हर बार यह जितना गिरती है उसका $\frac{81}{100}$ गुना ऊपर उठती है। इस गेंद की औसत चाल ज्ञात कीजिए। $\left( g =10\, ms ^{-2}\right.$ लीजिए) ($ms ^{-1}$ में)
$3.0$
$3.50$
$2.0$
$2.50$
प्रक्षेप्य गति में ${m_1}$ व ${m_2}$ द्रव्यमानों के कणों के वेग समय $t = 0$ पर क्रमश: $\overrightarrow {{v_1}} $व $x > {x_1}$ हैं। ये समय ${t_0}$पर टकराते हैं। उनके वेग समय $2{t_0}$पर $\overrightarrow {{v_1}} '$ व $\overrightarrow {{v_2}} '$ हो जाते हैं, जबकि अभी भी वे हवा में गतिमान हैं। तो $|({m_1}\overrightarrow {{v_1}} '\, + {m_2}\overrightarrow {{v_2}} ') - ({m_1}\overrightarrow {{v_1}} \, + {m_2}\overrightarrow {{v_2}} )|$ का मान है
$100$ सेमी/सै के वेग से क्षैतिज धरातल में गति करता एक $10$ ग्राम का द्रव्यमान, एक लोलक से टकराकर चिपक जाता है। लोलक के गोले की संहति भी $10$ ग्राम है। इस निकाय द्वारा तय की गई अधिकतम ऊँचाई ............ $cm$ होगी $(g = 10\,m/{s^2})$
एक घर्षणरहित क्षैतिज पष्ठ पर तीन पिंड $A , B$ तथा $C$ एक सरल रेखा में रखे गए हैं। $A , B$ तथा $C$ के द्रव्यमान क्रमशः $m , 2 \,m$ तथा $2 \,m$ हैं। पिंड, $A$ पिंड $B$ की तरफ $9\, m / s$ की गति से चलता है तथा इसके साथ एक प्रत्यास्थ संघट्टन करता है। इसके पश्चात पिंड $B$ पिंड $C$ के साथ एक पूर्णतया अप्रत्यासथ संघट्टन करता है। सभी गतियाँ उसी सरल रेखा के अनुदिश होती है। पिंड $C$ की अन्तिम गति $.....\,m/s$ है।
द्रव्यमान ' $m$ ' का एक कण चाल ' $2 v$' से जाते हुये एक द्रव्यमान ' $2 m$ ' के कण जो इसी दिशा में चाल ' $v$ ' से जा रहा है, से संघट्ट करता है। संघट्ट के बाद पहला कण स्थिर अवस्था में आ जाता है तथा दूसरा कण एक ही द्रव्यमान ' $m$ ' के दो कणों में विभाजित हो जाता है। ये दोनों कण आरम्भिक दिशा से $45^{\circ}$ के कोण पर जाते है। प्रत्येक चलायमान कण की गति का मान होगा।
एक $m$ द्रव्यमान का गोलक $I_1$ लम्बाई की डोरी से लटका हुआ है। इसे एक वेग दिया जाता है जो कि ऊर्ध्वाधर तल में एक वृत्त पूरा कराने के लिए न्यूनतम् है। अपने उच्चतम् बिन्दु पर यह गोलक दूसरे $m$ द्रव्यमान के गोलक से प्रत्यास्थ संघटट् करता है। दूसरा गोलक $I_2$ लम्बाई की डोरी से लटका हुआ है तथा प्रारंभ में विरामावस्था पर है। दोनों डोरियों द्रव्यमान रहित व अवितान्य हैं यदि संघटट के बाद दूसरे गोलक को ऐसी गति प्राप्त होती हैं जो कि ऊर्ध्वाधर तल में पूर्ण वृत्त पूरा करने के लिए न्यूनतम है, तब $\frac{ I _1}{ I _2}$ का अनुपात है :