एक ही पदार्थ की चार एकसमान छड़ों को एक-दूसरे के सिरों के साथ इस तरह जोड़ दिया गया है कि एक वर्ग बन जाये। यदि वर्ग के एक विकर्ण के सिरों पर तापान्तर $100°C$ है, तो दूसरे विकर्ण के सिरों पर तापान्तर ........ $^oC$ होगा (जहाँ l प्रत्येक छड़ की लम्बाई हे।)
$0$
$\frac{{100}}{l}$
$\frac{{100}}{{2l}}$
$100$
$r _{1}$ तथा $r _{2}$ त्रिज्याओं $\left( r _{1}\,<\, r _{2}\right)$ के दो पतले धातुत्वीय गोलीय कोशों को संपातित केन्द्रों के साथ रखा जाता है। दोनों कोशों के मध्य का भाग उष्मीय चालकता $K$ के पदार्थ से भरा है। आन्तरिंक कोश को ताप $\theta_{1}$ तथा बाहय कोश को ताप $\theta_{2}$ (जहाँ $\theta_{1}\,<\,\theta_{2}$ ) पर पोषित किया जाता है। पदार्थ से त्रिज्यीय प्रवाहित उष्मा की दर होती है।
नीचे दिये गये चित्र में, दो कुचालक प्लेटें चित्रानुसार जुड़ी हैं। इनके ऊष्मीय प्रतिरोध $R$ एवं $3R$ हैं। उभयनिष्ठ ताप $\theta$ ...... $^oC$ है
एक दीवार संपर्क में रखी दो सतहों $A$ तथा $B$ से बनी है। $A$ व $B$ दोनों अलग-अलग पदार्थ की हैं। उनकी मोटाईयाँ समान परन्तु $A$ की ऊष्मा चालकता $B$ की दुगनी है। ताप की स्थाई अवस्था में दीवार के सिरों का तापान्तर $60K$ हो तब सतह $A$ के सिरों पर तापान्तर ....... $K$ होगा
चार सर्वसम धात्विक छड़ों को मिलाकर एक वर्ग बनाया गया है। इस वर्ग के दो विकर्ण अभिमुख $(Diagonally\,\, opposite)$ बिन्दुओं के ताप स्थायी अवस्था में क्रमश: $T$ व $\sqrt 2 $ $T$ हैं। यह मानते हुए कि ऊष्मा का केवल चालन होता है, वर्ग के अन्य दो बिन्दुओं के बीच तापान्तर होगा
लकड़ी का गुटका एवं लोहे का गुटका एक मनुष्य को समान रूप से ठन्डे अथवा अथवा गर्म प्रतीत होते हैं। लकड़ी एवं लोहे के गुटकों के ताप हैं