एक फोटॉन का संवेग $2 \times {10^{ - 16}} $ ग्राम सेमी/सैकण्ड है तो उसकी ऊर्जा होगी
$0.61 \times {10^{ - 26}}erg$
$2.0 \times {10^{ - 26}}erg$
$6 \times {10^{ - 6}}erg$
$6 \times {10^{ - 8}}erg$
$200 \;W$ का सोडियम स्ट्रीट लैंप तरंगदैर्ध्य $0.6\;\mu m$ के पीले प्रकाश का उत्सर्जन करता है। यह मानते हुए कि यह विद्युत ऊर्जा को प्रकाश में परिवर्तित करने में $25\%$ दक्ष है, प्रति सेकंड उत्सर्जित पीले प्रकाश के फोटॉनों की संख्या है
$300 \ nm$ तरंगदैध्र्य का पराबैंगनी प्रकाश जिसकी तीव्रता $1.0\ watt/m^2$ है, एक प्रकाश संवेदी पदार्थ पर आपतित होता है। यदि आपतित फोटॉनों का $1$ प्रतिशत प्रकाश इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करता है तो $1.0 \ cm^2$ क्षेत्रफल से उत्सर्जित प्रकाश इलेक्ट्रॉनों की संख्या लगभग होगी
एक रेडियो ट्रॉन्समीटर $198.6$ मीटर तरंगदैध्र्य पर $1kW$ शक्ति उत्सर्जित करता है। प्रतिसैकण्ड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या है
प्रोटॉनों का $1$ माइक्रोऐम्पियर का पुंज जिसका अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल $0.5$ वर्ग मिलीमीटर है, $3 \times {10^4}m{s^{ - 1}}$ से गतिशील है। तब पुंज का आवेश घनत्व है
फोटोनों की दो धाराएँ, जिनकी ऊर्जाएँ, धातु के कार्यफलन की क्रमशः पाँच गुना एवं दस गुना हैं, उस धातु के तल पर आपतित होती हैं। दोनों परिस्थितियों में क्रमशः उत्सर्जित होने वाले फोटो इलेक्ट्रॉनों के अधिकतम वेगों का अनुपात होगा