प्राथमिक और द्वितीयक परिपथों में अन्योन्य प्रेरकत्व का मान $0.5 \,H$ है। प्राथमिक और द्वितीयक परिपथों के प्रतिरोध क्रमश: $20 \,\Omega$ और $5 \,\Omega$ हैं। द्वितीयक परिपथ में $0.4$ ऐम्पियर की धारा उत्पé करने के लिये यह आवश्यक है कि प्राथमिक परिपथ में निम्न दर से धारा परिवर्तित की जाये......... ऐम्पियर/सैकण्ड
$4$
$16$
$1.6$
$8$
जब एक कुण्डली में बहने वाली धारा $0.1$ सैकण्ड में $10$ ऐम्पियर से शून्य कर दी जाती है तो नजदीक रखी दूसरी कुण्डली में $100$ मिली वोल्ट का वि. वा. बल प्रेरित होता है। दोनों कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरण गुणांक का मान ......मिली हेनरी होगा
यदि प्राथमिक कुण्डली में बहने वाली $3.0$ ऐम्पियर धारा को $0.001$ सैकण्ड में शून्य कर दिया जाये, तो द्वितीयक कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल $15000$ वोल्ट होता है। इन कुण्डलियों का अन्योन्य प्रेरण गुणांक.......हेनरी है
एक प्रेरण कुण्डली का अन्योन्य प्रेरकत्व $5\,H$ है। यदि प्राथमिक कुण्डली में ${10^{ - 3}}\,s$ में धारा $5\,A$ से घटकर शून्य हो जाती है। द्वितीयक कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल का मान .......$V$ होगा
दो कुण्डली के अन्योन्य प्रेरकत्व का मान बढ़ाया जा सकता है
यदि किसी कुण्डली में $0.01 \,A$ का धारा परिवर्तन, दूसरी कुण्डली के चुम्बकीय फ्लक्स में $1.2 \times {10^{ - 2}}\,Wb$ का परिवर्तन करता है, तो दोनों कुण्डलियों के अन्योन्य प्रेरकत्व का मान हेनरी में.....$H$ है