एक ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक तथा द्वितीयक कुण्डली में फेरों की संख्या क्रमश: $5$ तथा $10$ है तथा ट्राँसफॉर्मर का अन्योन्य प्रेरकत्व $25$ हेनरी है। अब ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक तथा द्वितीयक कुण्डली में फेरों की संख्या क्रमश: $10$ तथा $5$ कर दी जाती है। ट्राँसफॉर्मर का नया अन्योन्य प्रेरकत्व हेनरी में होगा

  • A

    $6.25$

  • B

    $12.5$

  • C

    $25$

  • D

    $50$

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दो कुण्डलियाँ पास-पास रखी हुई हैं। दोनों कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरकत्व निर्भर करता है

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रुद्ध-दोल धारामापी का संकेतक स्थिर विक्षेप देता है क्योंकि

दो परिपथों के बीच अन्योन्य प्रेरकत्व $0.1\, H$ है। जब एक परिपथ में धारा $0.02$ सैकण्ड में $0$ से $20\, A$ हो जाती है तो दूसरे परिपथ में उत्पन्न  औसत विद्युत वाहक बल ......$V$ होगा

दो कुंडलियों का पारस्परिक प्रेरकत्व $0.002 \mathrm{H}$ है। प्रथम कुंडली में धारा $\mathrm{i}=\mathrm{i}_0 \sin \omega \mathrm{t}$ संबन्ध द्वारा परिवर्तित होती है, जहाँ $\mathrm{i}_0=5 \mathrm{~A}$ तथा $\omega=50 \pi \mathrm{rad} / \mathrm{s}$ है। द्वितीय कुंडली में वि.वा. बल का अधिकतम मान $\frac{\pi}{\alpha} \mathrm{V}$ है। $\alpha$ का मान __है।

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भुजा ' $a$ ' तथा एक फेरे वाला छोटा वर्गाकार लूप, भुजा $b$ तथा एक फेरे $( b \gg$ a) वाले बड़े वर्गाकार लूप के अन्दर रखा है। ये दोनों लूप समतलीय हैं तथा उनके केन्द्र संपाति हैं। यदि भुजा ' $b$ ' के वर्गाकार लूप में $I$ धारा प्रवाहित की जाती है, तो दोनों लूपों के बीच पारस्परिक प्रेरकत्व है :

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