प्रकाश विद्युतीय पदार्थ का कार्य फलन $3.3 eV$ है। इसकी देहली आवृत्ति का मान है

  • A

    $8 \times {10^4}Hz$

  • B

    $8 \times {10^{56}}Hz$

  • C

    $8 \times {10^{10}}Hz$

  • D

    $8 \times {10^{14}}Hz$

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एक $900\,nm$ तरंगदैर्ध्य एवं $100\,Wm ^{-2}$ तीव्रता वाली एक समानान्तर किरणपुँज, एक सतह पर आपतित होती है, जो कि किरणपुँज के लम्बवत् है। एक सेकेण्ड में किरणपुँज के लम्बवत् $1\,cm ^2$ क्षेत्रफल से गूजरने वाले फोटॉनों की संख्या होगी:

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फोटॉन की न्यूनतम तरंगदैध्र्य $5000 \mathring A$ है, तो इसकी ऊर्जा होगी

$1.7 \times {10^{ - 13}}$ जूल का एक फोटॉन विशेष परिस्थितियों में एक पदार्थ द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है सत्य कथन है

प्रकाश वैद्युत प्रभाव क प्रयाग म दहला आवृात्त की $1.5$ गुनी आवृत्ति का एक प्रकाश किसी प्रकाश सुग्राही पदार्थ के तल पर आपतित होता है। अब यदि आवृत्ति को आधा तथा तीव्रता को दो गुना कर दिया जाये तो उत्सर्जित प्रकाश इलेक्ट्रॉनों की संख्या होगी :

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यदि फोटॉन का संवेग $ p$ है, तो उसकी आवृत्ति होगी

(जबकि $m$  फोटाॅन का विराम द्रव्यमान है)