$A$ तथा $B$ दो सुचालक गोलों की त्रिज्याएँ $a$ तथा $b(b > a)$ तथा वायु में ये संकेन्द्रीय रखे हैं। $B$ को $+Q$ कूलॉम आवेश से आवेशित करते हैं, तथा $A$ को भू-सम्पर्कित करते हैं तो इनकी प्रभावी धारिता है
$4\pi {\varepsilon _0}\frac{{ab}}{{b - a}}$
$4\pi {\varepsilon _0}\,(a + b)$
$4\pi {\varepsilon _0}b$
$4\pi {\varepsilon _0}\frac{{{b^2}}}{{b - a}}$
$1$ मीटर त्रिज्या वाले धातु के गोले की धारिता के समान धारिता वाले $40$ मिमी व्यास वाले समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के बीच की दूरी ......मिमी होगी
जब एक लैम्प को संधारित्र के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है तो
एक धातु के गोले की धारिता $1\,\mu F$ हो, तो इसकी त्रिज्या लगभग होगी
एक बेलनाकार संधारित्र में $15 \,cm$ लंबाई एवं त्रिज्याएँ $1.5\, cm$ तथा $1.4\, cm$ के दो समाक्ष बेलन हैं। बाहरी बेलन भू-संपर्कित है और भीतरी बेलन को $3.5\, \mu C$ का आवेश दिया गया है। निकाय की धारिता और भीतरी बेलन का विभव ज्ञात कीजिए। अंत्य प्रभाव ( अर्थात् सिरों पर क्षेत्र रेखाओं का मुडना ) की उपेक्षा कर सकते हैं।
एक आवेशित बेलनाकार संधारित्र के वलयाकार अन्तराल (Annular region) में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता $E$ का परिमाण