एक गोलीय संधारित्र के भीतरी और बाह्य गोलों की त्रिज्याएँ क्रमश: $a$ और $b$ हैं। दोनों के मध्य हवा है। एक बार बाह्य गोला पृथ्वी से जोड़ें और दूसरी बार भीतरी गोला जोड़ें तो दोनों बार बने संधारित्रों की धारिताओं में अन्तर होगा
शून्य
$4\pi {\varepsilon _0}a$
$4\pi {\varepsilon _0}b$
$4\pi {\varepsilon _0}a\left( {\frac{b}{{b - a}}} \right)$
$1$ मीटर त्रिज्या वाले एक गोलीय चालक की धारिता है (फैरड में)
सावधानीपूर्वक उत्तर दीजिए:
$(a)$ दो बड़े चालक गोले जिन पर आवेश $Q_{1}$ और $Q_{2}$ हैं, एक-दूसरे के समीप लाए जाते हैं। क्या इनके बीच स्थिरवैध्यूत बल का परिमाण तथ्यत:
$Q_{1} Q_{2} / 4 \pi \varepsilon_{0} r^{2}$
द्वारा दर्शाया जाता है, जहाँ $r$ इनके केंद्रों के बीच की दूरी है?
$(b)$ यद् कूलॉम के नियम में $1 / r^{3}$ निर्भरता का समावेश ( $1 / r^{2}$ के स्थान पर) हो तो क्या गाउस का नियम अभी भी सत्य होगा?
$(c)$ स्थिरवैध्युत क्षेत्र विन्यास में एक छोटा परीक्षण आवेश किसी बिंदु पर विराम में छोड़ा जाता है। क्या यह उस बिंदु से होकर जाने वाली क्षेत्र रेखा के अनुदिश चलेगा?
$(d)$ इलेक्ट्रॉन द्वारा एक वृत्तीय कक्षा पूरी करने में नाभिक के क्षेत्र द्वारा कितना कार्य किया जाता है? यदि कक्षा दीर्घवृत्ताकार हो तो क्या होगा?
$(e)$ हमें ज्ञात है कि एक आवेशित चालक के पृष्ठ के आर-पार विध्युत क्षेत्र असंतत होता है। क्या वहाँ वैध्युत विभव भी असंतत होगा?
$(f)$ किसी एकल चालक की धारिता से आपका क्या अभिप्राय है?
$(g)$ एक संभावित उत्तर की कल्पना कीजिए कि पानी का परावैध्युतांक $(= 80),$ अभ्रक के परावैध्युतांक $(=6)$ से अधिक क्यों होता है?
$M.K.S.$ पद्धति में गोलीय चालक की धारिता होती है
$1/9\,F$ धारिता वाले एक धात्विक गोले की त्रिज्या होगी
$C$ धारिता की $n$ बूँदों को मिलाकर एक बड़ी बूँद बनायी गयी है, तो बड़ी बूँद में संचित ऊर्जा तथा प्रत्येक छोटी बूँद की ऊर्जा का अनुपात होगा