$50 \,kg$ द्रव्यमान की एक वस्तु को ऊध्र्वाधर ऊपर की ओर $100 \,m/sec$ के वेग से प्रक्षेपित किया जाता है। 5 सैकण्ड पश्चात् यह वस्तु $20 \,kg$ व $30\, kg$ के दो टुकड़ों में टूट जाती है। यदि $20 \,kg$ का टुकड़ा ऊपर की ओर $150\, m/sec$ से गति करे, तो दूसरे टुकड़े का वेग होगा
$15\, m/sec$ नीचे की ओर
$15 \,m/sec$ ऊपर की ओर
$51\, m/sec$ नीचे की ओर
$51 \,m/sec$ ऊपर की ओर
एक क्षैतिज व घर्षण रहित मेज पर रखे एक ठोस गुटके से एक गोली टकराती है एवं इसमें धँस जाती है। इसमें संरक्षित रहता है
$m$ द्रव्यमान का एक कण ${V_0}$ वेग से $m$द्रव्यमान के ही सरल लोलक से टकराता है तथा इससे चिपक जाता है। लोलक द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई होगी
दिए हुए चित्रानुसार, $250\,g$ द्रव्यमान के दो गुटके, एक दूसरे से $2\,Nm ^{-1}$ स्प्रिग गुणांक वाली स्प्रिग के द्वारा जुड़े हैं। यदि दोनों गुटकों को $v$ वेग से विपरित दिशाओं में चलाया जाता है, तो स्प्रिंग के विस्तार का अधिकतम मान होगा :
$M$ द्रव्यमान का एक अंतरिक्ष यान $v$ वेग से गति कर रहा है। यह अचानक समान द्रव्यमान $m$ के दो टुकड़ों में टूट जाता है। विस्फोट के पश्चात् $ m$ द्रव्यमान का एक भाग स्थिर हो जाता है। यान के दूसरे भाग का वेग होगा
रेखीय सरल आवर्त गति कर रहे किसी कण का स्थितिज ऊर्जा फलन $V(x)=k x^{2} / 2$ है, जहां $k$ दोलक का बल नियतांक है । $k=0.5$ $N m ^{-1}$ के लिए $V(x)$ व $x$ के मध्य ग्राफ चित्र में दिखाया गया है। यह दिखाइए कि इस विभव के अंतर्गत गतिमान कुल $1 \,J$ ऊर्जा वाले कण को अवश्य ही 'वापिस आना' चाहिए जब यह $x=\pm 2 m$ पर पहुंचता है।