एक छड़ की $25$ सेमी लम्बाई ताँबे की एवं $10$ सेमी निकिल एवं $15$ सेमी लम्बाई एल्युमीनियम की बनी है। प्रत्येक एक-दूसरे से पूर्णत: ऊष्मीय संतुलन में हैं। ताँबे की छड़ का एक सिरा $100^\circ C$ तथा एल्युमीनियम का बाह्य सिरा $0^\circ C$ पर है। पूर्ण $50$ सेमी लम्बी छड़ को एक पट्टे से ढका गया है, जिससे उनके पृष्ठों से ऊष्मा हानि नहीं होती है। $K$(ताम्बा) $= 0.92;$ ${K}$(एलुमिनियम) $=0.5$; ${K}$(निकिल) $= 0.14$ $CGS$ मात्रक हैं, तो $Cu - Ni$ और $Ni - Al$ सन्धियों पर क्रमश: ताप होगा
${23.33^o}C$ और $A$
${83.33^o}C$ और ${20^o}C$
${50^o}C$ और ${30^o}C$
${30^o}C$ और ${50^o}C$
चित्रानुसार उष्मीय प्रतिरोध $10.0$ केल्विन $\times$ वाट $^{-1}$ की एक छड़ $CD$ को समान छड़ $AB$ के मध्य में जड़ा जाता है। $A, B$ तथा $D$ किनारों को क्रमशः $200^{\circ} C, 100^{\circ} C , 125^{\circ} C$ पर पोषित किया जाता है। $CD$ में उष्मा धारा $P$ वाट है। $P$ का मान $.....$ है।
सर्ल विधि द्वारा धातु की ऊष्मा चालकता ज्ञात करने के प्रयोग में छड़ में अनुदिश ताप प्रवणता होती है
समान आकार की पाँच छड़ों को चित्रानुसार व्यवस्थित किया गया है। इनकी ऊष्मीय चालकताएँ ${K_1},\,{K_{2,\,}}{K_{3,}}\,{K_{4\,}}$ एवं ${K_5}$ है। जब $A$ और $B$ बिन्दुओं को विभिé तापों पर रखा जाता है तो बीच वाली छड़ से कोरई ऊष्मा प्रवाहित नहीं होती है, यदि
त्रिज्या $R$ का एक बेलन एक बेलनाकार कोश, जिसकी आंतरिक त्रिज्या $R$ तथा बाह्य त्रिज्या $2 R$ है, से घिरा है। आंतरिक बेलन की ऊष्मा चालकता $K_{1}$ तथा बाहय बेलन की ऊष्मा चालकता $K _{2}$ है। माना कि बेलनों से ऊष्मा क्षय शून्य है, तो इस निकाय की प्रभावी ऊष्मा चालकता, जबकि ऊष्मा का प्रवाह बेलन की लम्बाई के अनुदिश है, होगी।
दो पदार्थो जिनके ऊष्मा चालकता गुणांक $K$ तथा $2K$ तथा मोटाई क्रमश: $x$ तथा $4x$ है, को जोड़कर एक संयुक्त पट्टिका बनायी गयी है, जिसके दो बाह्य पृष्ठों के ताप क्रमश: $T_2$ तथा $T_1$ ($T_2$ > $T_1$). हैं। स्थायी अवस्था में इस पट्टिका से प्रवाहित ऊष्मा की दर $\left( {\frac{{A({T_2} - {T_1})K}}{x}} \right)f$, है, जिसमें $f$ का मान है