किसी अर्द्धगोलाकार सतह के वक्रता केन्द्र पर प्रकाश का एक बिंदु स्त्रोत रखा हुआ है। यह स्त्रोत $24 \mathrm{~W}$ की शक्ति उत्सर्जित करता है। अर्द्धगोलीय वक्र की वक्रता त्रिज्या $10 \mathrm{~cm}$ है एवं उसकी आंतरिक सतह पूर्णतः परावर्ती है। अर्द्धगोले पर, गिरने वाले प्रकाश के कारण आरोपित बल का मान $\times 10^{-8} \mathrm{~N}$ है।
$3$
$2$
$1$
$4$
एक इलेक्ट्रॉन की विराम द्रव्यमान ऊर्जा $0.51\ MeV$ है। यदि यह इलेक्ट्रॉन $0.8\ c$ वेग से गतिमान है (यहाँ $c$ निर्वात में प्रकाश की चाल है) तो इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा ................ $MeV$ होगी
$6eV$ ऊर्जा के फोटॉन, $4eV$ कार्यफलन के धात्विक पृष्ठ पर आपतित होते हैं। उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉनों की न्यूनतम गतिज ऊर्जा ............. $eV$ होगी
$66 eV$ ऊर्जा वाले फोटॉन की आवृत्ति होगी
मूल बिन्दु पर एक बिन्दु स्त्रोत $16 \times 10^{-8} \mathrm{Wm}^{-2}$ तीव्रता की ध्वनि तरंगें उत्पन्न करता है। मूल बिन्दु से क्रमशः $2 \mathrm{~m}$ तथा $4 \mathrm{~m}$ की दूरी पर स्थित बिन्दुओं पर उत्पन्न तीव्रताओं कें अन्तर का परिमाण. . . . . . .$\times 10^{-8} \mathrm{Wm}^{-2}$.
एक विशिष्ट प्रयोग में प्रकाश-विध्यूत प्रभाव की अंतक वोल्टता $1.5 \,V$ है। उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रोंनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा कितनी है?