जब प्रकाश दिये गये तरंगदैर्ध्य (wavelength) से एक धात्वीय पृष्ठ (metallic surface) पर पड़ता है तो उत्सर्जित (emitted) फोटोइलेक्ट्रॉन्स को रोकने के लिए $6.0 V$ के निम्नतम विभव की आवश्यकता होती है। यदि एक दूसरे स्त्रोत जिसका तरंगदैर्ध्य पहले वाले से चार गुना और तीव्रता (intensity) पहले वाले से आधी है को प्रयोग में लाया जाये तो विभव घट कर $0.6 V$ रह जाता है। पहले स्त्रोत की तरंगदैर्ध्य और धातु का कार्य फलन क्रमशः क्या होगा ?
$[\frac{h c}{e}=1.24 \times 10^{-6} Jm C ^{-1}$ लें ]
$1.72 \times 10^{-7} m , 1.20 eV$
$1.72 \times 10^{-7} m , 5.60 eV$
$3.78 \times 10^{-7} m , 5.60 eV$
$3.78 \times 10^{-7} m , 1.20 eV$
एक फोटॉन $1 \,km$ की ऊँचाई से पृथ्वी के गुरूत्वीय क्षेत्र में गिरता है। इसकी आवृत्ति में परिवर्तन की गणना करने लिए इसके द्रव्यमान को $h v / c^2$ लीजिये। आवृत्ति $v$ में भिन्नात्मक (fractional) परिवर्तन का सन्निकट मान क्या होगा ?
${10^{ - 10}}$ तरंगदैध्र्य के $X-$ किरण पुंज में फोटॉन का संवेग होगा
एक इलेक्ट्रान और फ्रोटान का एक समान तरंगदैर्ध्य $10^{-9} \,m$ है. यदि फ्रोटान की उर्जा $E$ तथा इलेक्ट्रान का संवेग $p$ हो तो $SI$ मात्रक में $E / p$ का मान होगा
फोटॉन का विराम द्रव्यमान होता है
निम्न में से कौनसा कथन असत्य है