निम्न का उत्तर दीजिए :
$(a)$ पृथ्वी के पृष्ठ के सापेक्ष वायुमंडल की ऊपरी परत लगभग $400\, kV$ पर है, जिसके संगत विध्यूत क्षेत्र ऊँचाई बढ़ने के साथ कम होता है। पृथ्वी के पृष्ठ के समीप विध्यूत क्षेत्र लगभग $100 V m ^{-1}$ है। तब फिर जब हम घर से बाहर खुले में जाते हैं, तो हमें विध्यूत आघात क्यों नहीं लगता? ( घर को लोहे का पिंजरा मान लीजिए, अतः उसके अंदर कोई विध्यूत क्षेत्र नहीं है !
$(b)$ एक व्यक्ति शाम के समय अपने घर के बाहर $2\, m$ ऊँचा अवरोधी पट्ट रखता है जिसके शिखर पर एक $1 \,m ^{2}$ क्षेत्रफल की बड़ी ऐलुमिनियम की चादर है। अगली सुबह वह यदि धातु की चादर को छूता है तो क्या उसे विध्यूत आघात लगेगा?
$(c)$ वायु की थोड़ी-सी चालकता के कारण सारे संसार में औसतन वायुमंडल में विसर्जन धारा $1800\, A$ मानी जाती है। तब यथासमय वातावरण स्वयं पूर्णत: निरावेशित होकर विध्यूत उदासीन क्यों नहीं हो जाता? दूसरे शब्दों में, वातावरण को कौन आवेशित रखता है?
$(d)$ तड़ित के दौरान वातावरण की विध्यूत ऊर्जा, ऊर्जा के किन रूपों में क्षयित होती है?
$(a)$ We do not get an electric shock as we step out of our house because the original equipotential surfaces of open air changes, keeping our body and the ground at the same potential.
$(b)$ Yes, the man will get an electric shock if he touches the metal slab next morning. The steady discharging current in the atmosphere charges up the aluminium sheet. As a result, its voltage rises gradually. The raise in the voltage depends on the capacitance of the capacitor formed by the aluminium slab and the ground.
$(c)$ The occurrence of thunderstorms and lightning charges the atmosphere continuously. Hence, even with the presence of discharging current of $1800 \;A$, the atmosphere is not discharged completely. The two opposing currents are in equilibrium and the atmosphere remains electrically neutral.
$(d)$ During lightning and thunderstorm, light energy, heat energy, and sound energy are dissipated in the atmosphere.
एक धातु के गोले की धारिता $1\,\mu F$ हो, तो इसकी त्रिज्या लगभग होगी
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता निर्भर करती है
दो संकेंद्री गोलीय चालकों जिनको उपयुक्त विध्यूतरोधी आलंबों से उनकी स्थिति में रोका गया है, से मिलकर एक गोलीय संधारित्र बना है ( चित्र )। दर्शाइए कि गोलीय संधारित्र की धारिता $C$ इस प्रकार व्यक्त की जाती है :
$C=\frac{4 \pi \varepsilon_{0} r_{1} r_{2}}{r_{1}-r_{2}}$
यहाँ $r_{1}$ और $r_{2}$ क्रमशः बाहरी तथा भीतरी गोलों की त्रिज्याएँ हैं।
समान त्रिज्या के पारे की आठ बूँदो पर समान आवेश है। इन्हें मिलाकर एक बड़ी बूँद बनायी गयाी है, तो प्रत्येक छोटी बूँद की तुलना में बडी बूँद की धारिता $.......$ गुना होगी
एक आवेशित बेलनाकार संधारित्र के वलयाकार अन्तराल (Annular region) में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता $E$ का परिमाण