एक सूक्ष्म गोला जिस पर आवेश ‘$q$ ’ है, इसे दो समान्तर प्लेटों के मध्य $L$ लंबाई की डोरी से चित्रानुसार लटकाया गया है। पेण्डुलम का आवर्तकाल ${T_0}$ है। जब समान्तर प्लटों को आवेशित कर दिया जाये तो आवर्तकाल $T$ हो जाता है। $T/{T_0}$ अनुपात होगा
${\left( {\frac{{g + \frac{{qE}}{m}}}{g}} \right)^{1/2}}$
${\left( {\frac{g}{{g + \frac{{qE}}{m}}}} \right)^{3/2}}$
${\left( {\frac{g}{{g + \frac{{qE}}{m}}}} \right)^{1/2}}$
None of these
$500\, \mu F$ धारिता के एक संधारित्र को $100\, \mu C/sec$ की दर से आवेशित करने पर कितने समयान्तराल पश्चात् इस पर $10\, V$ विभव आ.......$sec$ जायेगा
$1/9\,F$ धारिता वाले एक धात्विक गोले की त्रिज्या होगी
एक गोलाकार संधारित्र की धारिता $1\,\mu F$ है। यदि इसके दोनों गोलों के मध्य की दूरी $1\,mm$ है, तो बाह्य गोले की त्रिज्या होगी
निम्न का उत्तर दीजिए :
$(a)$ पृथ्वी के पृष्ठ के सापेक्ष वायुमंडल की ऊपरी परत लगभग $400\, kV$ पर है, जिसके संगत विध्यूत क्षेत्र ऊँचाई बढ़ने के साथ कम होता है। पृथ्वी के पृष्ठ के समीप विध्यूत क्षेत्र लगभग $100 V m ^{-1}$ है। तब फिर जब हम घर से बाहर खुले में जाते हैं, तो हमें विध्यूत आघात क्यों नहीं लगता? ( घर को लोहे का पिंजरा मान लीजिए, अतः उसके अंदर कोई विध्यूत क्षेत्र नहीं है !
$(b)$ एक व्यक्ति शाम के समय अपने घर के बाहर $2\, m$ ऊँचा अवरोधी पट्ट रखता है जिसके शिखर पर एक $1 \,m ^{2}$ क्षेत्रफल की बड़ी ऐलुमिनियम की चादर है। अगली सुबह वह यदि धातु की चादर को छूता है तो क्या उसे विध्यूत आघात लगेगा?
$(c)$ वायु की थोड़ी-सी चालकता के कारण सारे संसार में औसतन वायुमंडल में विसर्जन धारा $1800\, A$ मानी जाती है। तब यथासमय वातावरण स्वयं पूर्णत: निरावेशित होकर विध्यूत उदासीन क्यों नहीं हो जाता? दूसरे शब्दों में, वातावरण को कौन आवेशित रखता है?
$(d)$ तड़ित के दौरान वातावरण की विध्यूत ऊर्जा, ऊर्जा के किन रूपों में क्षयित होती है?
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता $15\,\mu \,F$ है, जबकि इसके प्लेटों के बीच की दूरी $6\,cm$ है। यदि प्लेटों के बीच की दूरी घटाकर $2\,cm$ कर दी जाये, तो अब इस संधारित्र की धारिता .........$\mu \,F$ होगी