आगे आने वाली दो संख्याओं का आकलन रोचक हो सकता है। पहली संख्या यह बताएगी कि रेडियो अभियांत्रिक फ़ोटॉन की अधिक चिंता क्यों नहीं करते। दूसरी संख्या आपको यह बताएगी कि हमारे नेत्र 'फ़ोटॉनों की गिनती' क्यों नहीं कर सकते, भले ही प्रकाश साफ़-साफ़ संसूचन योग्य हो।
$(a)$ एक मध्य तरंग (medium wave) $10\, kW$ सामथ्य के प्रेषी, जो $500\, m$ तरंगदैर्घ्य की रेडियो तरंग उत्सर्जित करता है, के द्वारा प्रति सेकंड उत्सर्जित फ़ोटॉनों की संख्या।
$(b)$ निम्नतम तीव्रता का श्वेत प्रकाश जिसे हम देख सकते हैं $\left(\sim 10^{-10}\, W m ^{-2}\right)$ के संगत फोटॉनों की संख्या जो प्रति सेकंड हमारे नेत्रों की पुतली में प्रवेश करती है। पुतली का क्षेत्रफल लगभग $0.4 \,cm ^{2}$ और श्वेत प्रकाश की औसत आवृत्ति को लगभग $6 \times 10^{14}\,Hz$ मानिए।
$(a)$ Power of the medium wave transmitter, $P=10\, kW =10^{4} \,W =10^{4} \,J / s$
Hence, energy emitted by the transmitter per second, $E =10^{4},$
Wavelength of the radio wave, $\lambda=500 \,m$
The energy of the wave is given as
$E_{1}=\frac{h c}{\lambda}$
Where, $h=$ Planck's constant $=6.6 \times 10^{-34}\, Js$
$c =$ Speed of light $=3 \times 10^{8} \,m / s$
$E_{1}=\frac{6.6 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^{8}}{500}=3.96 \times 10^{-28}\, J$
Let n be the number of photons emitted by the transmitter.
$\therefore n E _{1}= E$
$n=\frac{E}{E_{1}}$
$=\frac{10^{4}}{3.96 \times 10^{-28}}=2.525 \times 10^{31}$
$=3 \times 10^{34}$
The energy $(E_1)$ of a radio photon is very less, but the number of photons $(n)$ emitted per second in a radio wave is very large.
The existence of a minimum quantum of energy can be ignored and the total energy of a radio wave can be treated as being continuous.
$(b)$ Intensity of light perceived by the human eye,
$I=10^{-10} \;W m ^{-2}$
Area of a pupil, $A=0.4 cm ^{2}=0.4 \times 10^{-4} \,m ^{2}$
Frequency of white light, $v=6 \times 10^{14} \,Hz$.
The energy emitted by a photon is given as
$E = hv$
Where,
$h =$ Planck's constant $=6.6 \times 10^{-34} \,Js$ ,
$E =6.6 \times 10^{-34} \times 6 \times 10^{14}$
$=3.96 \times 10^{-19} \,J$
Let n be the total number of photons falling per second, per unit area of the pupil. The total energy per unit for n falling photons is given as
$E = n \times 3.96 \times 10^{-19} \,J s ^{-1}\, m ^{-2}$
The energy per unit area per second is the intensity of light.
$E = I$
$n \times 3.96 \times 10^{-19}=10^{-10}$
$n=\frac{10^{-10}}{3.96 \times 10^{-19}}$
$=2.52 \times 10^{8} \,m ^{2}\, s ^{-1}$
The total number of photons entering the pupil per second is given as
$n A = n \times A$ $=2.52 \times 10^{8} \times 0.4 \times 10^{-4}$
$=1.008 \times 10^{4}\, s^{-1}$
This number is not as large as the one found in problem $(a)$, but it is large enough for the human eye to never see the individual photons.
प्रकाश के फोटॉन सिद्धान्त के अनुसार, जब निर्वात में फोटॉन इलेक्ट्रान से टकराता है तब फोटॉन से सम्बद्ध कौनसी राशियाँ परिवर्तित नहीं होती हैं
यदि फोटॉन की ऊर्जा $4$ गुना बढ़ा दी जाये तो संवेग
आइन्सटीन की प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार उत्सर्जित फोटो इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा एवं आपतित विकिरण की आवृत्ति के बीच का ग्राफ होगा
दो प्रकाश स्त्रोत $200 \mathrm{~W}$ की शक्ति का प्रकाश उत्पन्न करते है। क्रमशः $300 \mathrm{~nm}$ व $500 \mathrm{~nm}$ तरंगदैर्ध्यो के प्रत्येक स्त्रोत द्वारा उत्सर्जित दृश्य प्रकाश के फोटानों की संख्याओं का अनुपात होगा :