विद्युत आवेशों के मध्य लगने वाले बलों से सम्बन्धित नियम है
ऐम्पियर का नियम
ओह्म का नियम
फैराडे का नियम
कूलॉम का नियम
दो धनात्मक आवेश वाले गोले जिनका द्रव्यमान $m_1$ तथा $m_2$ है, छत पर उभय बिन्दु से एकसमान कुचालक भारहीन डोरी, जिसकी लंबाई $l$ है, से लटके हुए हैं। दोनों गोलों का आवेश क्रमश: $q_1$ तथा $q_2$ है। साम्यावस्था में दोनों गोलों की डोरियाँ ऊर्ध्वाधर से समान कोण $\theta$ बनाती हैं। तब
निर्वात् में दो आवेश ${q_1}$, ${q_2}$ दूरी $d$ पर रखे गये हैं और इनके मध्य लगने वाला बल $F$ है। यदि उनके चारों ओर परावैद्युतांक $4$ वाला माध्यम भर दिया जाये तो अब बल का मान होगा
$5 \times {10^{ - 11}}\,C$ एवं $ - 2.7 \times {10^{ - 11}}\,C$ के दो आवेश एक दूसरे से $0.2$ मीटर की दूरी पर स्थित हैं। इन दोनों को जोड़ने वाली रेखा पर एक तीसरा आवेश $ - 2.7 \times {10^{ - 11}}\,C$ से कितनी ......मीटर दूरी पर रखा जाये कि उस पर कार्यरत कुल बल शून्य हो
एक धातु के ठोस पृथक्कीकृत गोलाकार पर $ + Q$ आवेश दिया गया है। गोलाकार पर आवेश का वितरण
दो समान टेनिस बॉलों को, जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान $'m'$ और आवेश $'q'$ है को $'l'$ लम्बाई के धागों के साथ एक स्थिर बिन्दु से लटकाया गया है। यदि प्रत्येक धागा, ऊर्ध्वाधर से छोटा कोण $'\theta'$ बनाए तो साम्यावस्था में धागों के बीच पथकन का मान होगा।