कोई बल $F = at + b{t^2}$से प्रदर्शित किया जाता है, जहाँ $t$ समय है $a$ व $b$ की विमायें होगी

  • A

    $ML{T^{ - 3}}$ तथा $M{L^2}{T^{ - 4}}$

  • B

    $ML{T^3}$ तथा $ML{T^{ - 4}}$

  • C

    $ML{T^{ - 1}}$ तथा $ML{T^0}$

  • D

    $ML{T^{ - 4}}$ तथा $ML{T^1}$

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एक दृढ़ घन $A$ का द्रव्यमान $M$ एवं इसकी प्रत्येक भुजा की लम्बाई $L$ है, यह एकसमान विमा के, दूसरे कम दृढ़ता गुणांक $(\eta )$ वाले घन $ B$ के ऊपर इस प्रकार से स्थित है कि $A$ का निचला पृष्ठ $B$ के ऊपरी पृष्ठ को पूरी तरह ढ़क लेता है। $B$ की निचली सतह दृढ़ता से क्षैतिज सतह पर स्थित है। एक अल्प परिमाण का बल $F,\,A$ की एक सतह पर लम्बवत् लगाया जाता है। बल को हटाने पर $A$ छोटे दोलन करने लगता है जिसका आवर्तकाल दिया जाता है

  • [IIT 1992]

विमीय विश्लेषण की नींव किसके द्वारा रखी गयी

यदि इलेक्ट्रॉन-आवेश $e$, इलेक्ट्रॉन-द्रव्यमान $m$, निर्वात् में प्रकाश के वेग $c$ तथा प्लाँक स्थिरांक $h$, को मूल राशियाँ मान लिया जाय तो, निर्वात् की चुम्बकशीलता $\mu_{0}$ का मात्रक होगा :

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$r$ त्रिज्या एवं $l$ लम्बाई की एक नली जिसके सिरे पर दाबान्तर $p$ है, से $\eta $ श्यानता का द्रव बह रहा है, तब प्रति सैकण्ड बहने वाले द्रव के आयतन $V$ के लिये विमीय रुप के संगत सम्बन्ध है

यदि गति $( V )$, त्वरण $( A )$ तथा बल $( F )$ को मूल भौतिक इकाइयाँ मानें तो, यंग प्रत्यास्थता गुणांक की विमा होगी।

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