अलग-अलग लम्बाईयों के पीतल एवं लोहे से निर्मित एक द्विधात्विक पट्टी का प्रयोग करके एक मात्रक पैमाना बनाना है, जिसकी लम्बाई तापमान के साथ परिवर्तित ना हो एवं $20\,cm$ ही रहे। दोनों धात्विक घटकों की लम्बाई इस प्रकार परिवर्तित हो कि उनकी लम्बाईयों के बीच का अंतर स्थिर रहे। यदि पीतल की लम्बाई $40\,cm$ है, तो लोहे की लम्बाई $...........cm$ होगी।
$\left(\alpha_{\text {iron }}=1.2 \times 10^{-5} K ^{-1}\right.$ एवं $\left.\alpha_{\text {brass }}=1.8 \times 10^{-5} K ^{-1}\right)$.
$59$
$6$
$60$
$600$
एक $100\;cm$ घात्विक छड़ को $0°C$ से $100°C$ तक गर्म करने पर इसकी लम्बाई $0.19\, cm$ से बढ़ जाती है, तो धातु का आयतन प्रसार गुणांक है
एक $L_0$ लम्बाई की बेलनाकार घात्विक छड़ को एक वलय के रूप में थोड़े से गेप के साथ मोड़ा गया है। इसको गर्म करने पर
$NTP$ पर जल $100°C$ पर उबलता है। गहरी खदान के अन्दर जल किस ताप पर उबलेगा
धातु की चादरों से घनाकार आकृति में बने एक बक्से की प्रत्येक भुजा की कमरे के ताप $T$ पर लम्बाई $'a'$ है, तथा धातु की चादर के पदार्थ का रैखिक प्रसार गुणांक $'\alpha'$ है। धातु की चादर को एक समान रूप से किसी अल्प ताप वृद्धि $\Delta T$ के लिए गरम किया गया है जिससे इसका ताप $T +\Delta T$ हो जाता है। धातु के बक्से के आयतन में वृद्धि होगी।
समान लंबाई परन्तु अलग-अलग त्रिज्याओं वाले दो बेलनाकार चालक (cylindrical conductors) श्रेणीक्रम में (in series) दो ऊष्माशयों (heat baths) के बीच में जोड़े गए हैं, जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है। इन ऊष्माशयओं का तापमान $T_1=300 \ K$ और $T_2=100 \ K$ हैं। बडेे चालक की त्रिज्या छोटे चालक की त्रिज्या की दोगुनी है। छोटे चालक की ऊष्मा चालकता (thermal conductivity) $K_1$ है और बड़े चालक की ऊष्मा चालकता $K_2$ है। यदि स्थायी अवस्था (steady state) में, बेलनों के संधि (junction) का तापमान $2000 \ K$ हो, तब $K_1 / K_2$ का मान .............. होगा।