एक इलेक्ट्रॉन गन जिसका संग्राहक $100 \,V$ विभव पर है, एक कम दाब $\left(-10^{-2} \,mm Hg \right)$ पर हाइड्रोजन से भरे गोलाकार बल्ब में इलेक्ट्रॉन छोड़ती है। एक चुंबकीय क्षेत्र जिसका मान $2.83 \times 10^{-4}\, T$ है, इलेक्ट्रॉन के मार्ग को $12.0\, cm$ त्रिज्या के वृत्तीय कक्षा में वक्रित कर देता है। (इस मार्ग को देखा जा सकता है क्योंकि मार्ग में गैस आयन किरण-पुंज को इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करके और इलेक्ट्रॉन प्रग्रहण के द्वारा प्रकाश उत्सर्जन करके फ़ोकस करते हैं; इस विधि को ' परिष्कृत किरण-पुंज नली' विधि कहते हैं।) आँकड़ों से $e / m$ का मान निर्धारित कीजिए।
Potential of an anode, $V=100 \,V$
Magnetic field experienced by the electrons, $B =2.83 \times 10^{-4}\, T$
Radius of the circular orbit $r =12.0 \,cm =12.0 \times 10^{-2}\, m$
Mass of each electron $= m ,$
Charge on each electron $= e ,$
Velocity of each electron $= v$
The energy of each electron is equal to its kinetic energy, i.e.,
$\frac{1}{2} m v^{2}=e V$
$v^{2}=\frac{2 e V}{m}\dots(i)$
It is the magnetic field, due to its bending nature, that provides the centripetal force $\left(F=\frac{m v^{2}}{r}\right)$ for the beam. Hence, we can write
Centripetal force $=$ Magnetic force
$\frac{m v^{2}}{r}=e v B$
$e B=\frac{m v}{r}$
$v=\frac{e B r}{m}$
Putting the value of $v$ in equation $(i),$ we get:
$\frac{2 e V}{m}=\frac{e^{2} B^{2} r^{2}}{m^{2}}$
$\frac{e}{m}=\frac{2 V}{B^{2} r^{2}}$
$=\frac{2 \times 100}{\left(2.83 \times 10^{-4}\right)^{2} \times\left(12 \times 10^{-2}\right)^{2}}=1.73 \times 10^{11} \,C kg ^{-1}$
Therefore, the specific charge ratio $(e/m)$ is $1.73 \times 10^{11}\, C k g^{-1}$
कैथोड किरणें होती हैं
थॉमसन स्पेक्ट्रोग्राफ के प्रयोग से प्राप्त $Y-X$ वक्र पर चार धनावेशित आयन $P,Q,R$ एवं $S$ स्थित हैं
बेनब्रिज $(Bainbridge)$ द्रव्यमान स्पेक्ट्रोग्राफ में दो प्लेटों के बीच की दूरी $1 cm$ है तथा इसके बीच $\,1000 V$ विभवान्तर का विद्युत क्षेत्र एवं $B = 1T$ का चुम्बकीय क्षेत्र आरोपित किया जाता है। तो धनात्मक (अविचलित) आयन का वेग होगा
कैथोड किरण की कण प्रकृति सिद्ध होने का कारण है
उत्सर्जित कैथोड किरणों की गतिज ऊर्जा निर्भर करती है