मिलिकन के तेल बूँद प्रयेाग में तेल बूंद का द्रव्यमान  $16 \times {10^{ - 6}}kg$ है एवं यह बूँद ${10^6}V/m$ के विद्युत क्षेत्र में संतुलित की जाती है। बूँद पर कूलॉम में आवेश क्या होगा, जबकि  $g = 10\,m/{s^2}$ है

  • A

    $6.2 \times {10^{ - 11}}$

  • B

    $16 \times {10^{ - 9}}$

  • C

    $16 \times {10^{ - 11}}$

  • D

    $16 \times {10^{ - 13}}$

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यदि कोई इलेक्ट्रॉन $ 1\, GHz$ ​ की आवृत्ति से दोलन करता है, तब इससे प्राप्त होंगी

निम्न प्रश्नों के उत्तर द्रीजिए :

$(a)$ ऐसा विचार किया गया है कि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के भीतर क्वार्क पर आंशिक आवेश होते हैं $[(+2 / 3) e ;(-1 / 3) e]$ । यह मिलिकन तेल-बूँद प्रयोग में क्यों नहीं प्रकट होते?

$(b)$ $e / m$ संयोग की क्या विशिष्टता है? हम $e$ तथा $m$ के विषय में अलग-अलग विचार क्यों नहीं करते?

$(c)$ गैसें सामान्य दाब पर कुचालक होती हैं परंतु बहुत कम दाब पर चालन प्रारंभ कर देती हैं। क्यों?

$(d)$ प्रत्येक धातु का एक निश्चित कार्य-फलन होता है। यदि आपतित विकिरण एकवर्णी हो तो सभी प्रकाशिक इलेक्ट्रॉन समान ऊर्जा के साथ बहर क्यों नहीं आते हैं? प्रकाशिक इलेक्ट्रोनों का एक ऊर्जा वितरण क्यों होता है?

$(e)$ एक इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा तथा इसका संवेग इससे जुड़े पदार्थ-तरंग की आवृत्ति तथा इसके तरंगदैर्घ्य के साथ निम्न प्रकार संबंधित होते हैं :

$E=h v, p=\frac{h}{\lambda}$

परंतु $\lambda$ का मान जहाँ भौतिक महत्व का है, $v$ के मान (और इसलिए कला चाल $v \lambda$ का मान ) का कोई भौतिक महत्व नहीं है। क्यों?

किसी इलेक्ट्रॉन गन में नियंत्रण ग्रिड को कैथोड के सापेक्ष ऋणात्मक विभव प्रदान किया गया है

मिलिकन के तेल बूँद प्रयोग में, तेल बूंद पर आवेश  $6.35 \times {10^{ - 19}}C$ है। तो बूंद पर कितने इलेक्ट्रॉनों की अधिकता होगी     

कैथोड किरणों में होते हैं