यदि एक अपरावर्तित तल, जिसका क्षेत्रफल $30 \;cm ^{2}$ है, पर $40$ मिनट तक $2.5 \times 10^{-6} \;N$ का औसत बल, प्रकाश तरंगों द्वारा आरोपित होता है, तो तल पर गिरने से पहले, प्रकाश का ऊर्जा फ्लक्स $\dots \;W / cm ^{2}$ होगा।
(निकटतम पूर्णांक में)
(यहाँ पूर्ण अवशोषण और अभिलम्बवत आपतन की स्थितियों को माना गया है।)
$36$
$16$
$30$
$25$
फोटॉन का विराम द्रव्यमान होता है
फोटोनों की दो धाराएँ, जिनकी ऊर्जाएँ, धातु के कार्यफलन की क्रमशः पाँच गुना एवं दस गुना हैं, उस धातु के तल पर आपतित होती हैं। दोनों परिस्थितियों में क्रमशः उत्सर्जित होने वाले फोटो इलेक्ट्रॉनों के अधिकतम वेगों का अनुपात होगा
सीजियम $(Cs)$,पोटैशियम $(K)$ तथा सोडियम $(Na)$का कार्यफलन क्रमशः $2.14\,eV,2.30\,eV$ तथा $2.75\,eV$ है। यदि आपतित वैद्युतचुंबकीय विकिरण की ऊर्जा $2.20\,eV$ है, इनमें से कौन सी प्रकाशसुग्राही सतह, प्रकाश इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित कर सकता है :
एक इलेक्ट्रान और फ्रोटान का एक समान तरंगदैर्ध्य $10^{-9} \,m$ है. यदि फ्रोटान की उर्जा $E$ तथा इलेक्ट्रान का संवेग $p$ हो तो $SI$ मात्रक में $E / p$ का मान होगा
$6 .0 \times 10^{14}\, Hz$ आवृत्ति का एकवर्णी प्रकाश किसी लेसर के द्वारा उत्पन्न किया जाता है। उत्सर्जन क्षमता $2.0 \times 10^{-3} \,W$ है। $(a)$ प्रकाश किरण-पुंज में किसी फ़ोटॉन की ऊर्जा कितनी है? $(b)$ स्त्रोत के द्वारा औसत तौर पर प्रति सेकंड कितने फ़ोटॉन उत्सर्जित होते हैं?