ऊध्र्वाधर $U-$नली में द्रव भरा हुआ है एवं नली की दोनों भुजाओं को भिन्न- भिन्न तापक्रम ${t_1}$ एवं ${t_2}$ पर रखा गया है। दोनों भुजाओं में द्रव स्तम्भ की ऊँचाई क्रमश: ${l_1}$ एवं ${l_2}$ है, तो द्रव के आयतन प्रसार गुणांक का मान होगा
$\frac{{{l_1} - {l_2}}}{{{l_2}{t_1} - {l_1}{t_2}}}$
$\frac{{{l_1} - {l_2}}}{{{l_1}{t_1} - {l_2}{t_2}}}$
$\frac{{{l_1} + {l_2}}}{{{l_2}{t_1} + {l_1}{t_2}}}$
$\frac{{{l_1} + {l_2}}}{{{l_1}{t_1} + {l_2}{t_2}}}$
एक लोलक घड़ी में लोलक की लम्बाई $0.1\, \%$ बढ़ा दी जाए, तो प्रतिदिन समय में त्रुटि $......\,s$ होती है
जब एक छड़ को गर्म किया जाता है परन्तु इसको प्रसारित नहीं होने दिया जाता है, तब इसमें उत्पन्न प्रतिबल निम्न में से किस पर निर्भर नहीं करता है
एक समरूप धातु छड़ को एक दण्ड पेण्डुलम के रूप में उपयोग किया जाता है। यदि कमरे का ताप $10°C$ से बढ़ जाता है एवं धातु का रेखीय प्रसार गुणांक $2 \times 10^{-6}$ प्रति $°C$ हो तब पेण्डुलम के आवर्तकाल में प्रतिशत वृद्धि होगी
एक $L_0$ लम्बाई की बेलनाकार घात्विक छड़ को एक वलय के रूप में थोड़े से गेप के साथ मोड़ा गया है। इसको गर्म करने पर
समान लम्बाई $l$ की तीन छड़ों को मिलाकर एक समबाहु त्रिभुज $PQR$ बनाया गया है, $PQ$ का मध्य बिन्दु $O$ है एवं अल्प तापक्रम की वृद्धि के लिए $OR$ का मान नियत रहता है। $PR$ व $RQ$ के रेखीय प्रसार गुणांक समान ${\alpha _2}$ हैं एवं $PQ$ का रेखीय प्रसार गुणांक ${\alpha _1}$ तब