प्रकाश की क्वाण्टम प्रकृति को किस परिघटना द्वारा समझाया जाता है
हाइगन तरंग सिद्धान्त से
प्रकाश वैद्युत प्रभाव से
मेक्सवेल के विद्युत चुम्बकीय सिद्धान्त से
डी-ब्रोग्ली सिद्धान्त से
$660 \;nm$ तरंगदैर्घ्य की एक लेज़ लाइट को रेटिना वियोजन को जोड़ने के लिए प्रयोग किया जाता है। यदि $60 \;ms$ चौड़ाई एवं $0.5 \;kW$ शक्ति के लेज़ स्पन्द (pulse) का प्रयोग किया जाये तो उस स्पन्द में फोटॉनों की संख्या लगभग होगी :
[प्लांक नियतांक $h =6.62 \times 10^{-34} \;Js$ ]
प्रकाश विद्युत प्रभाव के कारण धातु पृष्ठ से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा
मानव नेत्र हरे प्रकाश ($\lambda$ $= 5000\ \mathop A\limits^o $) के $5 × 10^4$ फोटॉन प्रति वर्ग मीटर प्रति सैकण्ड संसूचित कर सकता है, जबकि कान ${10^{ - 13}}\,(W/{m^2})$ संसूचित कर सकता है। नेत्र, कान की तुलना में लगभग कितने गुणक से अधिक संवेदनशील हैं
यदि आपतित फोटॉन की तरंगदैध्र्य कम कर दी जाये तो
एक रेडियो स्टेशन $300$ मीटर तरंगदैध्र्य वाली तरंगों को प्रसारित कर रहा है। यदि ट्रांसमीटर की विकीर्णन क्षमता $10 kW$ है, तो प्रति सैकण्ड विकरित होने वाले फोटॉन की संख्या है