एक इलेक्ट्रॉन की विराम द्रव्यमान ऊर्जा $0.51\ MeV$ है। यदि यह इलेक्ट्रॉन $0.8\ c$ वेग से गतिमान है (यहाँ $c$ निर्वात में प्रकाश की चाल है) तो इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा ................ $MeV$ होगी
$0.28$
$0.34$
$0.39$
$0.46$
प्रकाश विद्युत प्रभाव में, धात्विक सतह से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा निर्भर करती है
किसी अर्द्धगोलाकार सतह के वक्रता केन्द्र पर प्रकाश का एक बिंदु स्त्रोत रखा हुआ है। यह स्त्रोत $24 \mathrm{~W}$ की शक्ति उत्सर्जित करता है। अर्द्धगोलीय वक्र की वक्रता त्रिज्या $10 \mathrm{~cm}$ है एवं उसकी आंतरिक सतह पूर्णतः परावर्ती है। अर्द्धगोले पर, गिरने वाले प्रकाश के कारण आरोपित बल का मान $\times 10^{-8} \mathrm{~N}$ है।
$(a)$ एक निर्वात नली के तापित कैथोड से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की उस चाल का आकलन कीजिए जिससे वे उत्सर्जक की तुलना में $500\, V$ के विभवांतर पर रखे गए एनोड से टकराते हैं। इलेक्ट्रॉनों के लघु प्रारंभिक चालों की उपेक्षा कर दें। इलेक्ट्रॉन का आपेक्षिक आवेश अर्थात $e / m 1.76 \times 10^{11} \,C kg ^{-1}$ है।
$(b)$ संग्राहक विभव $10\, MV$ के लिए इलेक्ट्रॉन की चाल ज्ञात करने के लिए उसी सूत्र का प्रयोग करें, जो $(a)$ में काम में लाया गया है। क्या आप इस सूत्र को गलत पाते हैं? इस सूत्र को किस प्रकार सुधारा जा सकता है?
यदि फोटॉन की ऊर्जा $4$ गुना बढ़ा दी जाये तो संवेग
प्रकाश के फोटॉन सिद्धान्त के अनुसार, जब निर्वात में फोटॉन इलेक्ट्रान से टकराता है तब फोटॉन से सम्बद्ध कौनसी राशियाँ परिवर्तित नहीं होती हैं