चित्र में, एक काँच नलिका (रेखीय प्रसार गुणांक $\alpha$) में एक द्रव ऊपर तक भरा हुआ है जिसका आयतन प्रसार गुणांक $\gamma$ है। गर्म करने पर द्रव स्तम्भ की लम्बाई अपरिवर्तित रहती है। $\gamma$ एवं $\alpha$ के बीच सही सम्बन्ध है
$\gamma=\alpha$
$\gamma= 2\alpha$
$\gamma= 3\alpha$
$\gamma = \frac{\alpha }{3}$
शीशे की एक गोली नियत वेग $v$ से चलकर लक्ष्य से टकराकर तुरन्त रूक जाती है और इसका संपूर्ण द्रव्यमान $m$ पिघल जाता है, इसकी विशिष्ट ऊष्मा $S$, प्रारम्भिक ताप $25°C,$ गलनांक $475°C$ और गुप्त ऊष्मा $L$ है, तो वेग $v$ की गणना के लिये सही व्यंजक है
एक सेण्टीग्रेड एवं एक फारेनहाइट थर्मामीटर को उबलते पानी में डुबोया गया है। पानी का ताप तब तक गिराया जाता है, जब तक कि फारेनहाइट तापमापी $140°F$ नोट करता है। सेण्टीगे्रड थर्मामीटर द्वारा नोट की गई ताप में गिरावट ...... $^o$ है
एक काँच पात्र में मरकरी का आभासी प्रसार गुणांक $153 \times 10{^{-6}}{°C^{-1}}$ एवं स्टील पात्र में मरकरी का आभासी प्रसार गुणांक $144 \times 10{^{-6}}{°C^{-1}}$ है। यदि स्टील के लिए a का मान $12 × 10 {^{-6}}{°C^{-1}}$ हो, तब ग्लास के लिए $\alpha$ का मान होगा
स्पष्ट कीजिए कि क्यों
$(a)$ अधिक परावर्तकता वाले पिण्ड अल्प उत्सर्जक होते हैं।
$(b)$ कंपकंपी वाले दिन लकड़ी की ट्रे की अपेक्षा पीतल का गिलास कहीं अधिक शीतल प्रतीत होता है।
$(c)$ कोई प्रकाशिक उत्तापमापी (उच्च तापों को मापने की युक्ति), जिसका अंशांकन किसी आदर्श कृष्णिका के विकिरणों के लिए किया गया है, खुले में रखे किसी लाल तप्त लोहे के टुकड़े का ताप काफी कम मापता है, परन्तु जब उसी लोहे के टुकड़े को भट्ठी में रखते हैं, तो वह ताप का सही मान मापता है।
$(d)$ बिना वातावरण के पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाएगी।
$(e)$ भाप के परिचालन पर आधारित तापन निकाय तप्त जल के परिचालन पर आधारित निकायों की अपेक्षा भवनों को उष्ण बनाने में अधिक दक्ष होते हैं।
$0^o C$ पर स्थित $1$ ग्राम बर्फ को $100^o C$ वाले जल में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ऊष्मा ............. $\mathrm{cal}$ हेागी