एक आवेशित बेलनाकार संधारित्र के वलयाकार अन्तराल (Annular region) में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता $E$ का परिमाण
सभी बिन्दुओं पर एकसमान है
आन्तरिक बेलन के पास वाले बिन्दुओं की तुलना में बाहरी बेलन के पास वाले बिन्दुओं पर अधिक है
$1/r$ के अनुरूप बदलता है (यहाँ $r$ अक्ष से दूरी है)
$1/{r^2}$ के अनुरूप परिवर्तित होता है (यहाँ $r$ अक्ष से दूरी है)
दो एकसमान धातु की पतली प्लेटों पर क्रमशः $q _1$ और $q _2$ आवेश इस प्रकार है कि $q _1 > q _2 \mid C$ धारिता का एक समानान्तर पट्टिका संधारित्र बनाने के लिए दोनों प्लेटें एक-दूसरे के पास लायी जाती हैं, तो दोनों के बीच विभवान्तर है :
$R_1$ त्रिज्या का एक ठोस गोला, एक दूसरे संकेन्द्री खोखले $R_1$ त्रिज्या वाले सुचालक गोले से घिरा हुआ है। इस संयोजन की धारिता निम्न के समानुपाती है
$C _{1}$ एवं $C _{2}$ धारिता के दो संधारित्रों को क्रमशः $120\, V$ तथा $200\, V$ विभव से आवेशित किया जाता है। इन्हें आपस में जोड़ने पर यह पाया जाता है कि इनमें से प्रत्येक पर विभव का मान शून्य है। तब
किसी वस्तु पर आवेश तथा विभव का अनुपात कहलाता है
$2\,\mu F$ धारिता वाले एक संधारित्र को एकसमान रूप से $0$ से $5$ $C$ तक आवेशित किया जाता है। निम्न में से कौनसा ग्राफ संधारित्र पर विभवान्तर और आवेश के सम्बन्ध को सही दर्शाता है