एक संधारित्र की दो प्लेटों पर विभव क्रमश: $+10\,V$ एवं $-10\,V$ है। यदि एक प्लेट पर आवेश $40\,C$ है तो संधारित्र की धारिता .......$F$ होगी

  • A

    $2 $

  • B

    $4$

  • C

    $0.5$

  • D

    $0.25$

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$C$ धारिता की $n$ बूँदों को मिलाकर एक बड़ी बूँद बनायी गयी है, तो बड़ी बूँद में संचित ऊर्जा तथा प्रत्येक छोटी बूँद की ऊर्जा का अनुपात होगा

दो जुड़े हुए आवेशित पिण्डों के बीच कोई धारा नहीं बहती जब उनमें समान होता है

उच्च वोल्टेज वाले संधारित्र को जब हम उच्च वोल्टेज हटाने के पश्चात् भी स्पर्श करते हैं तब संधारित्र की प्रवृत्ति है

समान्तर प्लेट संधारित्र धारिता का मूल्य किस पर आश्रित नहीं है

निम्न का उत्तर दीजिए :

$(a)$ पृथ्वी के पृष्ठ के सापेक्ष वायुमंडल की ऊपरी परत लगभग $400\, kV$ पर है, जिसके संगत विध्यूत क्षेत्र ऊँचाई बढ़ने के साथ कम होता है। पृथ्वी के पृष्ठ के समीप विध्यूत क्षेत्र लगभग $100 V m ^{-1}$ है। तब फिर जब हम घर से बाहर खुले में जाते हैं, तो हमें विध्यूत आघात क्यों नहीं लगता? ( घर को लोहे का पिंजरा मान लीजिए, अतः उसके अंदर कोई विध्यूत क्षेत्र नहीं है !

$(b)$ एक व्यक्ति शाम के समय अपने घर के बाहर $2\, m$ ऊँचा अवरोधी पट्ट रखता है जिसके शिखर पर एक $1 \,m ^{2}$ क्षेत्रफल की बड़ी ऐलुमिनियम की चादर है। अगली सुबह वह यदि धातु की चादर को छूता है तो क्या उसे विध्यूत आघात लगेगा?

$(c)$ वायु की थोड़ी-सी चालकता के कारण सारे संसार में औसतन वायुमंडल में विसर्जन धारा $1800\, A$ मानी जाती है। तब यथासमय वातावरण स्वयं पूर्णत: निरावेशित होकर विध्यूत उदासीन क्यों नहीं हो जाता? दूसरे शब्दों में, वातावरण को कौन आवेशित रखता है?

$(d)$ तड़ित के दौरान वातावरण की विध्यूत ऊर्जा, ऊर्जा के किन रूपों में क्षयित होती है?