स्प्रिंग तुला के लिये भार तथा पाठ्यांक के बीच ग्राफ दर्शाया गया है। स्प्रिंग का बल नियतांक....... किग्रा/सेमी होगा
$0.1$
$5$
$0.3$
$1$
दो सर्वसम गुटके $A$ और $B$, जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान $m$ है, प्राकतिक लम्बाई $L$ और कमानी नियतांक $K$ की किसी हल्की कमानी से संयोजित होकर किसी चिकने पष्ठ पर विराम की स्थित में हैं। कोई तीसरा गुटका $C$, जिसका द्रव्यमान $m$ है, $A$ और $B$ को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश चाल $v$ से गमन करते हुए गुटके $A$ से संघट्ट करता है। कमानी में होने वाला अधिकतम संपीडन है।
गतिशील न्यूट्रॉनों का मंदन : किसी नाभिकीय रिऐक्टर में तीव्रगामी न्यट्रॉन ( विशिष्ट रूप से वेग $10^{7} \,m s ^{-1}$ ) को $10^{3} \,m s ^{-1}$ के वेग तक मंदित कर दिया जाना चाहिए ताकि नाभिकीय विखंडन अभिक्रिया में न्यूट्रॉन की यूरिनियम के समस्थानिक ${ }_{92}^{23} \,U$ से अन्योन्यक्रिया करने की प्रायिकता उच्च हो जाए। सिद्ध कीजिए कि न्यूटोंन एक हलके नाभिक, जैसे ड्यूटीरियम या कार्बन जिसका द्रव्यमान न्यूटॉन के द्रव्यमान का मात्र कुछ गुना है, से प्रत्यास्थ संघट करने में अपनी अधिकांश गतिज ऊर्जा की क्षति कर देता है। ऐसे पदार्थ प्राय: भारी जल $\left( D _{2} O \right)$ अथवा ग्रेफाइट, जो न्यूट्रॉनों की गति को मंद कर देते हें, 'मंदक' कहलाते हैं।
कमानी स्थिरांक $100\; N / m$ की किसी कमानीदार बन्दूक में द्रव्यमान $100\; g$ की कोई छोटी गेंद $'B'$ इसकी बैरल में (आरेख देखिए) कमानी को $0.05\; m$ संपीडित करके रखी है। धरती पर दूरी $d$ पर किसी बॉक्स को रखा जाना चाहिए ताकि यह गेंद उस बॉक्स में गिरे। यदि गेंद धरती से $2 \;m$ ऊँचाई पर बन्दूक से क्षैतिजत : निकलती है तो $'d'$ का मान $\dots\;m$ होगा। $\left( g =10\; m / s ^{2}\right)$
जब $1.0 kg$ द्रव्यमान को $50 cm$ लम्बाई की स्प्रिंग से लटकाया जाता है, तो स्प्रिंग $2 cm$ खिंच जाती है। यदि द्रव्यमान को तब तक नीचे खींचा जाये जब तक कि स्प्रिंग $60 cm$ लम्बी न हो जाये तो इस स्थिति में स्प्रिंग में संचित प्रत्यास्थ ऊर्जा ............ $\mathrm{Joule}$ होगी (यदि $g = 10\;m/s)$
चाबी भरी हुई घड़ी की स्प्रिंग में संरक्षित ऊर्जा है