$C _{1}$ एवं $C _{2}$ धारिता के दो संधारित्रों को क्रमशः $120\, V$ तथा $200\, V$ विभव से आवेशित किया जाता है। इन्हें आपस में जोड़ने पर यह पाया जाता है कि इनमें से प्रत्येक पर विभव का मान शून्य है। तब

  • [JEE MAIN 2013]
  • A

    $9C_1=4C_2$

  • B

    $5C_1=3C_2$

  • C

    $3C_1=5C_2$

  • D

    $3C_1+5C_2=0$

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किसी चालक को दिया गया विभव, निर्भर करता है

धातु के दो आवेशित गोले जिनकी त्रिज्याएँ क्रमश: $20$ सेमी तथा $10$ सेमी हैं, प्रत्येक पर $150$ माइक्रो कूलॉम का धनावेश है। किसी चालक तार द्वारा दोनों गोलों को जोड़ दिए जाने के पश्चात् उभयनिष्ठ विभव होगा

त्रिज्या $R_1$ वाले एक एकाकी चालक गोले की धारिता $n$ गुना हो जाती है, जब इसे $R _2$ त्रिज्या वाले, पृथ्वी से जुड़े हुए एक समकेन्द्रीय चालक गोले के अंदर रखा जाता है। उनकी त्रिज्याओं का अनुपात $\left(\frac{ R _2}{ R _1}\right)$ है:

  • [JEE MAIN 2022]

$R_1$ त्रिज्या का एक ठोस गोला, एक दूसरे संकेन्द्री खोखले $R_1$ त्रिज्या वाले सुचालक गोले से घिरा हुआ है। इस संयोजन की धारिता निम्न के समानुपाती है

$A$ तथा $B$ दो सुचालक गोलों की त्रिज्याएँ $a$ तथा $b(b > a)$ तथा वायु में ये संकेन्द्रीय रखे हैं। $B$ को $+Q$ कूलॉम आवेश से आवेशित करते हैं, तथा $A$ को भू-सम्पर्कित करते हैं तो इनकी प्रभावी धारिता है