समान द्रव्यमान $40 \,kg$ की दो वस्तुयें विपरीत दिशाओं में गतिमान है एक का वेग $10$$m/s$ तथा दूसरी का $7\,m/s$ है। यदि वे प्रत्यास्थ रूप से टकराने के पश्चात् संयुक्त होकर गति करें तो, इस संयोजन का वेग ........... मी/सैकण्ड होगा
$10$
$7$
$3$
$1.5$
एक कण $h $ ऊँचाई से एक स्थिर क्षैतिज तल पर गिरता है तथा ऊछलता है। यदि $e $ निष्कृति गुणांक हो, तो कण के विराम में आने से पहले चली गई कुल दूरी होगी
माना $m$ द्रव्यमान का कोई कण $u$ वेग से विरामावस्था में स्थित समान द्रव्यमान के एक अन्य कण से प्रत्यास्थ संघट्ट करता है। संघट्ट के पश्चात् प्रक्षेप्य तथा संघट्ट कण अपनी गति की प्रारंभिक दिशा से क्रमश: ${\theta _1}$ तथा ${\theta _2}$ कोण पर गति करने लगते हैं। कोणों के योग ${\theta _1} + {\theta _2},$ का मान .....$^o$ होगा
किसी लोलक के गोलक $A$ को, जो ऊर्ध्वाधर से $30^{\circ}$ का कोण बनाता है, छोड़े जाने पर मेज पर, विरामावस्था में रखे दूसरे गोलक $B$ से टकराता है जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है। ज्ञात कीजिए कि संघट्ट के पश्चात् गोलक $A$ कितना ऊंचा उठता है? गोलकों के आकारों की उपेक्षा कीजिए और मान लीजिए कि संघट्ट प्रत्यास्थ है।
समान द्रव्यमान के दो पूर्ण प्रत्यास्थ कण $P$ व $Q$, उनको जोड़ने वाली रेखा के अनुदिश क्रमश: $15\,m/\sec $ व $10\,m/\sec $ के वेग से गति कर रहे हैं। टक्कर के पश्चात् उनके वेग क्रमश: होंगे ($m/s $ में)
एक $m$ द्रव्यमान का गोलक $I_1$ लम्बाई की डोरी से लटका हुआ है। इसे एक वेग दिया जाता है जो कि ऊर्ध्वाधर तल में एक वृत्त पूरा कराने के लिए न्यूनतम् है। अपने उच्चतम् बिन्दु पर यह गोलक दूसरे $m$ द्रव्यमान के गोलक से प्रत्यास्थ संघटट् करता है। दूसरा गोलक $I_2$ लम्बाई की डोरी से लटका हुआ है तथा प्रारंभ में विरामावस्था पर है। दोनों डोरियों द्रव्यमान रहित व अवितान्य हैं यदि संघटट के बाद दूसरे गोलक को ऐसी गति प्राप्त होती हैं जो कि ऊर्ध्वाधर तल में पूर्ण वृत्त पूरा करने के लिए न्यूनतम है, तब $\frac{ I _1}{ I _2}$ का अनुपात है :