$200 \;W$ का सोडियम स्ट्रीट लैंप तरंगदैर्ध्य $0.6\;\mu m$ के पीले प्रकाश का उत्सर्जन करता है। यह मानते हुए कि यह विद्युत ऊर्जा को प्रकाश में परिवर्तित करने में $50\%$ दक्ष है, प्रति सेकंड उत्सर्जित पीले प्रकाश के फोटॉनों की संख्या है
$62 \times 10^{20}$
$3 \times 10^{20}$
$1.5 \times 10^{20}$
$6 \times 10^{18}$
यदि एक अपरावर्तित तल, जिसका क्षेत्रफल $30 \;cm ^{2}$ है, पर $40$ मिनट तक $2.5 \times 10^{-6} \;N$ का औसत बल, प्रकाश तरंगों द्वारा आरोपित होता है, तो तल पर गिरने से पहले, प्रकाश का ऊर्जा फ्लक्स $\dots \;W / cm ^{2}$ होगा।
(निकटतम पूर्णांक में)
(यहाँ पूर्ण अवशोषण और अभिलम्बवत आपतन की स्थितियों को माना गया है।)
$660 \;nm$ तरंगदैर्घ्य की एक लेज़ लाइट को रेटिना वियोजन को जोड़ने के लिए प्रयोग किया जाता है। यदि $60 \;ms$ चौड़ाई एवं $0.5 \;kW$ शक्ति के लेज़ स्पन्द (pulse) का प्रयोग किया जाये तो उस स्पन्द में फोटॉनों की संख्या लगभग होगी :
[प्लांक नियतांक $h =6.62 \times 10^{-34} \;Js$ ]
सर्वप्रथम प्रकाश विद्युत प्रभाव को सफलतापूर्वक किसने समझाया
आइन्सटीन की प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार उत्सर्जित फोटो इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा एवं आपतित विकिरण की आवृत्ति के बीच का ग्राफ होगा
$40$ सेमी. फोकस दूरी का एक उत्तल लैंस का प्रकाश विद्युत सेल पर वृहद स्त्रोत का प्रतिबिम्ब बनाता है। जिससे धारा I उत्पन्न होती है। यदि लैंस को एक समान व्यास तथा $20$ सेमी. फोकस दूरी के दूसरे लैंस द्वारा बदल दिया जाता है। जब प्रकाश विद्युत धारा होगी :