$10 \,m$ ऊँचाई से गिरकर एक वस्तु कठोर तल पर उछलती है यदि यह टकराने में $20\%$ ऊर्जा खो देती है, तो निष्कृति गुणांक है
$0.89$
$0.56$
$0.23$
$0.18$
$20\, kg$ द्रव्यमान की एक वस्तु $10\,m/s$ की चाल से, एक अन्य स्थिर $5\, kg$ की वस्तु से टकराती है। संघट्ट के परिणाम स्वरूप दोनों वस्तुयें परस्पर चिपक जाती हैं। संयुक्त द्रव्यमान की गतिज ऊर्जा ............ $J$ होगी
एक भारी, खोखली और सीधी नलिका के अक्ष की दिशा में एक $III$ द्रव्यमान का छोटा कण गतिशील है और वह नलिका के दोनों सिरों से प्रत्यास्थी संघट्ट (elastic collision) करता है। नलिका की सतह पर कोई घर्षण नही है और इसका एक सिरा एक समतल सतह से बंद है जबकि दूसरे सिरे पर एक समतल सतह वाला भारी चलायमान पिस्टन है जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है। जब पिस्टन बंद सिरे से $L = L _0$ की दूरी पर है तब कण की गति $v = v _0$ है। पिस्टर को अंदर की ओर बहुत कम गति $V \ll \frac{ dL }{ L } v _0$ से चलाते है, जहाँ $dL$ पिस्टन का अतिसूक्ष्म (infinitesimal) विस्थापन है। निम्नलिखित कथनों में से कौनसा/कौनसे सही है( हैं) ?
$(1)$ कण के पिस्टन से टकराने की दर $v/L$ है।
$(2)$ पिस्टन से प्रत्येक संघट्ट के बाद कण की गति $2 V$ से बढ़ जाती है।
$(3)$ जब पिस्टन $L _0$ से $\frac{1}{2} L _0$ तक जाता है तब कण की गतिज ऊर्जा $4$ गुना अधिक हो जाती है।
$(4)$ यदि पिस्टन अंदर की तरफ $dL$ दूरी चलता है तब कण की गति $2 v \frac{ dL }{ L }$ से बढ़ जाती है।
समान द्रव्यमान के दो पूर्ण प्रत्यास्थ कण $P$ व $Q$, उनको जोड़ने वाली रेखा के अनुदिश क्रमश: $15\,m/\sec $ व $10\,m/\sec $ के वेग से गति कर रहे हैं। टक्कर के पश्चात् उनके वेग क्रमश: होंगे ($m/s $ में)
यदि एक न्यूट्रॉन की एक स्थिर अवस्था के ड्यूटीरियम से प्रत्यास्थ एक रेखीय संघट्ट होती है, तो उसकी ऊर्जा का आंशिक क्षय $p _{ d }$ पाया जाता है एवं उसके स्थिर अवस्था के कार्बन नाभिक से समरूप संघट्ट में ऊर्जा का आंशिक क्षय $p _{ c }$ पाया जाता है। $p _{ d }$ तथा $p _{ c }$ के मान क्रमश: होंगे
रेखीय संवेग के संरक्षण का सिद्धान्त उसी स्थिति में लागू होता है जब दो टकराने वाले कणों में टक्कर का समय