दो व्यक्ति $A$ तथा $B$ एक चौड़ी जलधारा के विपरीत तट पर खड़े है और एक $3.5 \,m$ चौड़ी जलधारा को पार करना चाहते हैं । दोनों के पास लकड़ी की दृढ़ तख्ती है जिनके द्रव्यमान नगण्य है | ये दोनों तख्ते $3$ मीटर (meter) से थोड़ी सी ज्यादा लम्बाई के है | उन्होने दोनों तख्तों को चित्रानुसार व्यवस्थित किया है | यदि $B$ जिसका द्रव्यमान $17 \,Kg$ है, तख्ते पर खड़ा हो तो तख्ते पर चलते हुए पार करने के लिये $A$ का महत्तम द्रव्यमान निम्नलिखित में से ......... $kg$ करीब होगा?
$17 \,kg$
$65 \,kg$
$80 \,kg$
$105 \,kg$
$70$ सेंटीमीटर लंबी और $4.00\, kg$ द्रव्यमान की धातु की छड़ के दोनों सिरों से $10$ सेंटीमीटर दूर रखे दो क्षुर-धारों पर टिकी है। इसके एक सिरे से $40$ सेंटीमीटर की दूरी पर $6.00\, kg$ द्रव्यमान का एक भार लटकाया गया है। क्षुर-धारों पर लगने वाले प्रतिक्रिया बलों की गणना कीजिए। (छड़ को समांग और समान अनुप्रस्थ काट वाली मान सकते हैं।)
नीचे दिया गया चित्र परिशुद्ध रूप से बेलनाकार एक शैम्पू की बोतल को दर्शाता है. एक साधारण प्रयोग में शैम्पू के अलग-अलग आयतनों से भरी बोतरों के स्थायित्व का अध्ययन किया गया. बोतल को एक तरफ झुकाने के बाद छोड़ दिया जाता है. मान लीजिये कोण $\theta$, उस क्रांतिक कोणीय विस्थापन को दर्शाता है, जिस पर बोतल अपने स्थायित्व को खोकर गिर जाती है. उस रेखा चित्र का चुनाव कीजिए जो शैम्पू से भरे हिससे $f(f=1$, पूर्ण रूप से भरी बोतल का द्योतक है) और क्रांतिक कोणीय विस्थापन $\theta$ के संबन्ध को सही रूप से दर्शाता है.
एक निर्देश तंत्र जो एक जड़त्वीय निर्देश तंत्र की तुलना में त्वरित हो, अजड़त्वीय निर्देश तंत्र कहलाता है। स्थिर कोणीय वेग $\omega$ से घूमती हुई डिस्क पर बद्ध (fixed) निर्देश तंत्र अजड़त्वीय तंत्र का एक उदाहरण है। $m$ द्रव्यमान का एक कण घूमती हुई डिस्क पर गतिमान है। गतिमान कण डिस्क पर बद्ध निर्देश तंत्र के सापेक्ष बल $\vec{F}_{\text {rot }}$ तथा एक जड़त्वीय निर्देश तंत्र के सापेक्ष बल $\vec{F}_{\text {in }}$ को महसूस करता है। $\vec{F}_{\text {rot }}$ और $\vec{F}_{\text {in }}$ के बीच का संबंध निम्नलिखित समीकरण में दिया गया है
$\vec{F}_{\text {rot }}=\vec{F}_{\text {in }}+2 m\left(\vec{v}_{\text {rot }} \times \vec{\omega}\right)+m(\vec{\omega} \times \vec{r}) \times \vec{\omega},$
यहाँ पर $\vec{v}_{\text {rot }}$ घूमते हुए निर्देश तंत्र में कण का वेग है तथा $\vec{r}$ कण का डिस्क के मध्य बिन्दु के सापेक्ष स्थिति सदिश (position vector) है।
मानिए कि $R$ त्रिज्या की एक डिस्क, जिसमें व्यास के समानान्तर एक घर्षणरहित खाँचा है, एक स्थिर कोणीय गति $\omega$ से अपने अक्ष पर वामावर्त दिशा में घूम रही है। एक निर्देश तंत्र मानिए जिसका मूलबिंदू डिस्क के मध्य बिन्दु पर है एवं $x$-अक्ष खाँचे के समानान्तर है, $y$-अक्ष खाँचे के अभिलम्ब पर है एवं $z$-अक्ष घूमने वाली अक्ष के समानान्तर है $(\vec{\omega}=\omega \hat{k}) । m$ द्रव्यमान वाले एक छोटे गुटके को समय $t=0$ पर $\vec{r}=(R / 2) \hat{i}$ बिन्दु पर धीरे से इस तरह से रखा जाता है कि वो सिर्फ खाँचे में ही चल सके।
($1$) समय $t$ पर गुटके की दूरी $r$ का मान है:
$(A)$ $\frac{R}{4}\left(e^{\omega t}+e^{-\omega t}\right)$
$(B)$ $\frac{R}{2} \cos \omega t$
$(C)$ $\frac{R}{4}\left(e^{2 \omega t}+e^{-2 \omega t}\right)$
$(D)$ $\frac{R}{2} \cos 2 \omega t$
($2$) गुटके पर डिस्क की नेट प्रतिक्रिया (net reaction) है:
$(A)$ $\frac{1}{2} m \omega^2 R\left(e^{2 \omega t}-e^{-2 \omega t}\right) \hat{j}+m g \hat{k}$
$(B)$ $\frac{1}{2} m \omega^2 R\left(e^{\omega t}-e^{-\omega t}\right) \hat{j}+m g \hat{k}$
$(C)$ $-m \omega^2 R \cos \omega t \hat{j}-m g \hat{k}$
$(D)$ $m \omega^2 R \sin \omega t \hat{j}-m g \hat{k}$
दिये गए सवाल का जवाब दीजिये ($1$) और ($2$)
एक एकसमान छड़ $AB$ को चित्रानुसार बिन्दु $X$, जो कि $A$ से $x$ दूरी पर है, से लटकाया जाता है। इस छड़ को क्षैतिज रखने के लिये उसके सिरे $A$ से एक द्रव्यमान $m$ को लटकाते है। इस तरह $( m , x)$ मानों का एक समूह प्राप्त होता है। इस समूह से उचित चर, जिनको आलोखित करने से एक सीधी रेखा प्राप्त हो, होंगे
$W$ भार की एक असमांग छड़ को, उपेक्षणीय भार वाली दो डोरियों से चित्र में दर्शाये अनुसार लटका कर विरामावस्था में रखा गया है। डोरियों द्वारा ऊर्ध्वाधर से बने कोण क्रमश: $36.9^{\circ}$ एवं $53.1^{\circ}$ हैं। छड़ $2\, m$ लम्बाई की है। छड़ के बाएँ सिरे से इसके गुरुत्व केन्द्र की दूरी $d$ ज्ञात कीजिए।