दो कण, जिनके स्थिति सदिश $\overrightarrow {{r_1}} = (3\hat i + 5\hat j)\,m$ तथा $\overrightarrow {{r_2}} = ( - 5\hat i - 3\hat j)\,m$ है, क्रमश: $\overrightarrow {{V_1}} = (4\hat i + 3\hat j)\,m/s$ तथा $\overrightarrow {{V_2}} = (\alpha \hat i + 7\hat j)\,m/s$ चाल से गतिमान है। यदि ये $2 $ सैकण्ड पश्चात् टकराते हों, तो $\alpha $ का मान है
$2$
$4$
$6$
$8$
दो कण $A$ तथा $B$ स्थिर वेग क्रमश: $\overrightarrow{ v }_{1}$ तथा $\overrightarrow{ v }_{2}$ से गति कर रहे है । प्रारंभिक क्षण में उनके सदिश क्रमश $\overrightarrow{ r }$ तथा $\overrightarrow{ r }_{2}$ हैं तो, $A$ तथा $B$ के संघट्ट होने के लिये शार्त है
$v$ वेग से गतिशील $10$ ग्राम की एक गोली स्थिर लोलक के गोलक से सम्मुख टकराती है तथा $100$ मी/से वेग से प्रतिक्षेप करती है। लोलक की लम्बाई $0.5$ मी तथा लोलक का द्रव्यमान $1$ किग्रा है। $v=......$ मी/से के न्यूनतम मान पर लोलक पूर्ण वत्त घूमता है। (मान लीजिए डोरी अवितान्य है तथा $g=10$ मी/से $^{2}$ है)
किसी लोलक के गोलक $A$ को, जो ऊर्ध्वाधर से $30^{\circ}$ का कोण बनाता है, छोड़े जाने पर मेज पर, विरामावस्था में रखे दूसरे गोलक $B$ से टकराता है जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है। ज्ञात कीजिए कि संघट्ट के पश्चात् गोलक $A$ कितना ऊंचा उठता है? गोलकों के आकारों की उपेक्षा कीजिए और मान लीजिए कि संघट्ट प्रत्यास्थ है।
अचर वेग $u$ से गतिमान $m$ द्रव्यमान का एक गोला उसी द्रव्यमान के स्थिर गोले से टकराता है। यदि प्रत्यावस्थान गुणांक $e$ हो, तो टक्कर के पश्चात दोनों गोलों के वेगों का अनुपात होगा
$20$ मीटर ऊँचाई से एक गेंद ऊध्र्वाधर नीचे की ओर किसी प्रारम्भिक वेग से क्षैतिज तल पर प्रक्षेपित की जाती है। संघट्ट के दौरान यह $50\%$ ऊर्जा खो देती है तथा समान ऊँचाई तक उछलती है। इसका प्रारम्भिक प्रक्षेपण वेग .............. $\mathrm{m} / \mathrm{s}^{-1}$ होगा