जब किसी स्प्रिंग को $2 \,cm $ तक खींचा जाता है, तो इसमें $100\,J$ ऊर्जा संचित हो जाती है। यदि इसे $2\, cm $ और खींचा जाये तो संचित ऊर्जा में वृद्धि .......... $\mathrm{J}$ है
$100$
$200$
$300$
$400$
एक स्प्रिंग, जिसका स्प्रिंग नियतांक $k$ है, को $1 \,cm$ तक खींचने पर इसकी स्थितिज ऊर्जा $U$ है। यदि इसे $4\, cm$ की दूरी तक खींचा जाये तो स्थितिज ऊर्जा होगी
दो समान प्रकार कि स्प्रिंग $P$ तथा $Q$ जिनके स्प्रिंग नियतांक $K_P$ तथा $K_Q$ हैं तथा $K_P > K_Q$ . प्रथम बार (स्थित $a$ में) दोनों को समान लम्बाई में तथा दूसरी बार (स्थति $b$ में ) समान बल से खींचा जाता है। यदि इन दोनों स्प्रिंगों द्वारा किये गये कार्य क्रमशः $W_P$ तथा $W_Q$ हों तो स्थिति $(a)$ तथा $(b)$ में इनके बीच संबन्ध क्रमशः होंगे
$A$ व $B$, $m$ द्रव्यमान के एकसमान गुटके हैं। ये दोनों एक घर्षण-हीन तल पर एक स्प्रिंग द्वारा जोड़कर रखे हैं। स्प्रिंग की सामान्य लम्बाई $L$ एवं बल नियतांक $K$ है। प्रारम्भ में स्प्रिंग सामान्य अवस्था में है। अब एक अन्य सर्वसम गुटका $C$ (द्रव्यमान$-m$) $v$ वेग से $A$ व $B$ को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश $A$ से टकराता है। स्प्रिंग में उत्पन्न अधिकतम संपीड़न है
एक चिकने क्षैतिज तल पर $1.5$ मी/ सै के वेग से गतिशील $0.5kg$ द्रव्यमान की एक वस्तु लगभग भारहीन स्प्रिंग, जिसका स्प्रिंग नियतांक $k = 50\;N/m$ है, से टकराती है। स्प्रिंग का अधिकतम संपीड़न ............. $\mathrm{m}$ होगा
गतिशील न्यूट्रॉनों का मंदन : किसी नाभिकीय रिऐक्टर में तीव्रगामी न्यट्रॉन ( विशिष्ट रूप से वेग $10^{7} \,m s ^{-1}$ ) को $10^{3} \,m s ^{-1}$ के वेग तक मंदित कर दिया जाना चाहिए ताकि नाभिकीय विखंडन अभिक्रिया में न्यूट्रॉन की यूरिनियम के समस्थानिक ${ }_{92}^{23} \,U$ से अन्योन्यक्रिया करने की प्रायिकता उच्च हो जाए। सिद्ध कीजिए कि न्यूटोंन एक हलके नाभिक, जैसे ड्यूटीरियम या कार्बन जिसका द्रव्यमान न्यूटॉन के द्रव्यमान का मात्र कुछ गुना है, से प्रत्यास्थ संघट करने में अपनी अधिकांश गतिज ऊर्जा की क्षति कर देता है। ऐसे पदार्थ प्राय: भारी जल $\left( D _{2} O \right)$ अथवा ग्रेफाइट, जो न्यूट्रॉनों की गति को मंद कर देते हें, 'मंदक' कहलाते हैं।