किसी नलिका से बहने वाले द्रव के क्रांतिक वेग $v _{ c }$ की विमाओं को $\left[\eta^{ x } \rho^{ y } r ^{ x }\right]$ से निर्दिप्ट किया जाता है जहाँ $\eta, \rho$ तथा $r$ क्रमश: द्रव का श्यानता गुणांक, द्रव का घनत्व तथा नलिका की त्रिज्या है, तो $x , y$ तथा $z$ क्रमश: मान है
प्लांक स्थिरांक $h$, प्रकाश की चाल $c$ तथा गुरूत्वाकर्षण स्थिरांक $G$ को लम्बाई की इकाई $L$ तथा द्रव्यमान की इकाई $M$ बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। तब सही कथन है (है)
$(A)$ $M \propto \sqrt{ c }$ $(B)$ $M \propto \sqrt{ G }$ $(C)$ $L \propto \sqrt{ h }$ $(D)$ $L \propto \sqrt{G}$
यदि एक साईकिल चालक वृत्ताकार पथ पर गति करते समय ऊध्र्वाधर से $\theta $ कोण से झुक जाता है, तब $\theta $ का मान सूत्र $\tan \theta = \frac{{rg}}{{{v^2}}}$ (जहाँ संकेतों के सामान्य अर्थ हैं) द्वारा प्राप्त किया जाता है। यह सूत्र
यदि ऊर्जा $(E)$, वेग $(v)$ तथा समय $(T)$ को मूल राशियाँ माना जाये तो पृष्ठ तनाव की विमा होंगी