एक त्रिज्या $R$ तथा द्रव्यमान $M$ की एकसमान डिस्क केवल अपनी अक्ष के परितः घूर्णन के लिये स्वतंत्र है। चित्रानुसार इस डिस्क की परिधि पर एक डोरी लपेटकर, डोरी के स्वतंत्र सिरे से एक द्रव्यमान $m$ को बाँधा गया है। यदि द्रव्यमान को स्थिरावस्था से छोड़ा जाता है तो उसका त्वरण होगा

821-820

  • [JEE MAIN 2017]
  • A

    $\frac{{2mg}}{{2m + M}}$

  • B

    $\frac{{2Mg}}{{2m + M}}$

  • C

    $\frac{{2mg}}{{2M + m}}$

  • D

    $\frac{{2Mg}}{{2M + m}}$

Similar Questions

$\ell$ लम्बाई और $m$ द्रव्यमान वाली एक छड़ $A$ के परित : ऊर्ध्वाधर समतल में घूर्णन करने के लिए मुक्त है। यह छड़ जो आरंभिक रूप से क्षैतिज स्थिति में है छोड़ दी गयी। छड़ का आरंभिक कोणीय त्वरण है $( A$ के परित : छड़ का जड़त्व आघूर्ण है $\frac{ m \ell^{2}}{3}$ ):

  • [AIPMT 2007]

एक निर्देश तंत्र जो एक जड़त्वीय निर्देश तंत्र की तुलना में त्वरित हो, अजड़त्वीय निर्देश तंत्र कहलाता है। स्थिर कोणीय वेग $\omega$ से घूमती हुई डिस्क पर बद्ध (fixed) निर्देश तंत्र अजड़त्वीय तंत्र का एक उदाहरण है। $m$ द्रव्यमान का एक कण घूमती हुई डिस्क पर गतिमान है। गतिमान कण डिस्क पर बद्ध निर्देश तंत्र के सापेक्ष बल $\vec{F}_{\text {rot }}$ तथा एक जड़त्वीय निर्देश तंत्र के सापेक्ष बल $\vec{F}_{\text {in }}$ को महसूस करता है। $\vec{F}_{\text {rot }}$ और $\vec{F}_{\text {in }}$ के बीच का संबंध निम्नलिखित समीकरण में दिया गया है

$\vec{F}_{\text {rot }}=\vec{F}_{\text {in }}+2 m\left(\vec{v}_{\text {rot }} \times \vec{\omega}\right)+m(\vec{\omega} \times \vec{r}) \times \vec{\omega},$

यहाँ पर $\vec{v}_{\text {rot }}$ घूमते हुए निर्देश तंत्र में कण का वेग है तथा $\vec{r}$ कण का डिस्क के मध्य बिन्दु के सापेक्ष स्थिति सदिश (position vector) है।

मानिए कि $R$ त्रिज्या की एक डिस्क, जिसमें व्यास के समानान्तर एक घर्षणरहित खाँचा है, एक स्थिर कोणीय गति $\omega$ से अपने अक्ष पर वामावर्त दिशा में घूम रही है। एक निर्देश तंत्र मानिए जिसका मूलबिंदू डिस्क के मध्य बिन्दु पर है एवं $x$-अक्ष खाँचे के समानान्तर है, $y$-अक्ष खाँचे के अभिलम्ब पर है एवं $z$-अक्ष घूमने वाली अक्ष के समानान्तर है $(\vec{\omega}=\omega \hat{k}) । m$ द्रव्यमान वाले एक छोटे गुटके को समय $t=0$ पर $\vec{r}=(R / 2) \hat{i}$ बिन्दु पर धीरे से इस तरह से रखा जाता है कि वो सिर्फ खाँचे में ही चल सके।

($1$) समय $t$ पर गुटके की दूरी $r$ का मान है:

$(A)$ $\frac{R}{4}\left(e^{\omega t}+e^{-\omega t}\right)$

$(B)$ $\frac{R}{2} \cos \omega t$

$(C)$ $\frac{R}{4}\left(e^{2 \omega t}+e^{-2 \omega t}\right)$

$(D)$ $\frac{R}{2} \cos 2 \omega t$

($2$) गुटके पर डिस्क की नेट प्रतिक्रिया (net reaction) है:

$(A)$ $\frac{1}{2} m \omega^2 R\left(e^{2 \omega t}-e^{-2 \omega t}\right) \hat{j}+m g \hat{k}$

$(B)$ $\frac{1}{2} m \omega^2 R\left(e^{\omega t}-e^{-\omega t}\right) \hat{j}+m g \hat{k}$

$(C)$ $-m \omega^2 R \cos \omega t \hat{j}-m g \hat{k}$

$(D)$ $m \omega^2 R \sin \omega t \hat{j}-m g \hat{k}$

दिये गए सवाल का जवाब दीजिये ($1$) और ($2$)

  • [IIT 2016]

$W$ भार की एक असमांग छड़ को, उपेक्षणीय भार वाली दो डोरियों से चित्र में दर्शाये अनुसार लटका कर विरामावस्था में रखा गया है। डोरियों द्वारा ऊर्ध्वाधर से बने कोण क्रमश: $36.9^{\circ}$ एवं $53.1^{\circ}$ हैं। छड़ $2\, m$ लम्बाई की है। छड़ के बाएँ सिरे से इसके गुरुत्व केन्द्र की दूरी $d$ ज्ञात कीजिए।

$A B C$ एक समबाहु त्रिभुज है, जिसका केन्द्र $O$ है। $\vec{F}_{1}, \vec{F}_{2}$ तथा $\vec{F}_{3}$ क्रमशः $A B, B C$ तथा $A C$ दिशा में लगे बल हैं। यदि $O$ के परितः कुल बल-आघूर्ण (टॉक) शून्य हो तो, $\vec{F}_{3}$ का मान होगा

  • [AIPMT 2012]

लम्बाई $'l'$ की एक एकसमान छड़ नगण्य त्रिज्या के एक ऊर्ध्वाधर डण्डे पर कीलकित (pivoted) है। जब यह डण्डा कोणीय गति $\omega$ से घूमता है तो छड़ इससे $\theta$ कोण बनाती है (चित्र देखें)। $\theta$ का मान ज्ञात करने के लिये हम छड़ के द्रव्यमान केन्द्र $(CM)$ के सापेक्ष इसके कोणीय संवेग में होने वाले परिवर्तन (जिसका मान $\frac{ m \ell^{2}}{12} \omega^{2} \sin \theta \cos \theta$ है और जिसकी दिशा इस तल के अन्दर की ओर है) को इस पर लगने वाले क्षैतिज $F _{ H }$ व ऊर्ध्वाधर $F _{ V }$ बलों के $CM$ के सापेक्ष आघूर्ण के बराबर लेते हैं। तब $\theta$ का मान ऐसा होगा कि ......।

  • [JEE MAIN 2020]