यदि इलेक्ट्रॉन-आवेश $e$, इलेक्ट्रॉन-द्रव्यमान $m$, निर्वात् में प्रकाश के वेग $c$ तथा प्लाँक स्थिरांक $h$, को मूल राशियाँ मान लिया जाय तो, निर्वात् की चुम्बकशीलता $\mu_{0}$ का मात्रक होगा :
$\left( {\frac{h}{{m{e^2}}}} \right)$
$\left( {\frac{{hc}}{{m{e^2}}}} \right)$
$\left( {\frac{h}{{c{e^2}}}} \right)$
$\left( {\frac{{m{c^2}}}{{h{e^2}}}} \right)$
एक सरल लोलक पर विचार कीजिए, जिसमें गोलक को एक धागे से बाँध कर लटकाया गया है और जो गुरुत्व बल के अधीन दोलन कर रहा है। मान लीजिए कि इस लोलक का दोलन काल इसकी लम्बाई $(l)$, गोलक के द्रब्यमान $(m)$ और गुर्त्वीय त्वरण $(g)$ पर निर्भर करता है। विमाओं की विधि का उपयोग करके इसके दोलन-काल के लिए सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
यदि पृष्ठ तनाव $( S )$, जड़त्व आघूर्ण $( I )$ तथा प्लांक नियतांक $(h)$ को मूलभूत इकाई मानें तो रेखीय संवेग का विमा सूत्र होगा।
विमीय विश्लेषण के द्वारा प्रतिरोधकता (resistivity) को मूलभूत नियतांकों $h, m_\theta, c, e, \varepsilon_0$ के माध्यम से निम्न में से किसके रूप में निरुपित किया जा सकता है ?
प्लांक स्थिरांक $h$, प्रकाश की चाल $c$ तथा गुरूत्वाकर्षण स्थिरांक $G$ को लम्बाई की इकाई $L$ तथा द्रव्यमान की इकाई $M$ बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। तब सही कथन है (है)
$(A)$ $M \propto \sqrt{ c }$ $(B)$ $M \propto \sqrt{ G }$ $(C)$ $L \propto \sqrt{ h }$ $(D)$ $L \propto \sqrt{G}$