यदि लम्बाई की विमायें ${G^x}{c^y}{h^z}$ से प्रदर्शित की जाती हैं, जहाँ $G,\,c$ और $h$ क्रमश: सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक, प्रकाश का वेग और प्लांक नियतांक हैं, तो
$x = \frac{1}{2},\,\,y = \frac{1}{2}$
$x = \frac{1}{2},\,\,z = \frac{1}{2}$
$y = - \frac{3}{2},\,\,z = \frac{1}{2}$
(b) तथा (c) दोनो
एक स्तम्भ, जिसमें $\eta $ श्यानता गुणांक का श्यान द्रव भरा है, में से होकर एक स्टील की छोटी गेंद जिसकी त्रिज्या $r$ है, को गुरुत्वीय त्वरण के अधीन गिराया जाता है। कुछ समय पश्चात गेंद एक नियत मान ${v_T}$ जिसे सीमान्त मान कहते है, को प्राप्त कर लेती है। सीमान्त वेग ${\rm{(i)}}$गेंद के द्रव्यमान $m$ पर ${\rm{(ii)}}$ $\eta $ पर ${\rm{(iii)}}$ $r$ पर ${\rm{(iv)}}$ और गुरुत्वीय त्वरण $g$ पर निर्भर करता है। निम्न में से कौनसा सम्बन्ध विमीय रुप से सही है
कोहरे की स्थिति में वह दूरी $d$, जहाँ से सिग्नल स्पष्ट रूप से दिखाई दे, जानने के लिए एक रेलवे इंजीनियर विमीय विश्लेषण का प्रयोग करता है। उसके अनुसार यह दूरी $d$ कोहरे के द्रव्यमान घनत्व $\rho$ सिग्नल के प्रकाश की तीव्रता $S$ (शक्ति/क्षेत्रफल) तथा उसकी आवृत्ति $f$ पर निर्भर है। यदि इंजीनियर $d$ को $S ^{1 / n}$ के समानुपाती पाता है, तब $n$ का मान है :
सूची $-I$ | सूची $-II$ |
$(a)$ धारिता, $C$ | $(i)$ ${M}^{1} {L}^{1} {T}^{-3} {A}^{-1}$ |
$(b)$ मुक्त आकाश की विधुत शीलता, $\varepsilon_{0}$ | $(ii)$ ${M}^{-1} {L}^{-3} {T}^{4} {A}^{2}$ |
$(c)$ मुक्त आकाश की पारगम्यता, $\mu_{0}$ | $(iii)$ ${M}^{-1} L^{-2} T^{4} A^{2}$ |
$(d)$ विधुत क्षेत्र, $E$ | $(iv)$ ${M}^{1} {L}^{1} {T}^{-2} {A}^{-2}$ |
यदि वेग $[ V ]$, समय $[ T ]$ तथा बल $[ F ]$ मूल राशियां मानी जाएं, तो द्रव्यमान की विमा होगी।
किसी ग्रह के लिये कक्षीय वेग निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है $v = {G^a}{M^b}{R^c}$, तब